राजकीय पॉलिटेक्निक में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, शिक्षकों ने सीखी भविष्य की तकनीक

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तकनीकी शिक्षा को उद्योग से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए शनिवार 14 फरवरी 2026 को राजकीय पॉलिटेक्निक, जमुई में इलेक्ट्रिक व्हीकल विषय पर एक दिवसीय विशेष हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया

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जमुई. तकनीकी शिक्षा को उद्योग से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए शनिवार 14 फरवरी 2026 को राजकीय पॉलिटेक्निक, जमुई में इलेक्ट्रिक व्हीकल विषय पर एक दिवसीय विशेष हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया. प्रशिक्षण का संचालन आइआइटी पटना के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में किया गया, इसमें आसपास के तकनीकी संस्थानों के शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. कार्यक्रम में राजकीय पॉलिटेक्निक शेखपुरा व राजकीय पॉलिटेक्निक नवादा के व्याख्याताओं सहित कई तकनीकी शिक्षकों ने भाग लेकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की नई तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझा. प्रशिक्षण के दौरान इलेक्ट्रिक वाहन की संरचना, बैटरी प्रबंधन प्रणाली, चार्जिंग टेक्नोलॉजी, मोटर कंट्रोलर, सुरक्षा मानक तथा मेंटेनेंस के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गयी. संस्थान के प्राचार्य डॉ नीरज कुमार सिंह ने बताया कि बदलते औद्योगिक परिवेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल तकनीक आने वाले समय की प्रमुख आवश्यकता है. ऐसे में तकनीकी शिक्षकों को आधुनिक कौशल से लैस करना अत्यंत जरूरी है, ताकि विद्यार्थी भी रोजगारोन्मुख शिक्षा प्राप्त कर सकें. उन्होंने कहा कि विभागीय निर्देश के आलोक में आयोजित यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को भविष्य के उद्योगों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. प्रशिक्षण सत्र का संचालन इंडस्ट्री विशेषज्ञ इंजीनियर लोकेंद्र जोहारे ने किया, जो माइन इंस्ट्रुमेंट प्राइवेट लिमिटेड से आए थे. उन्होंने प्रतिभागियों को वास्तविक उपकरणों पर कार्य कराते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल की असेंबली-डिसअसेंबली, फॉल्ट डायग्नोसिस तथा ट्रबलशूटिंग की प्रक्रिया समझाई. शिक्षकों ने बैटरी पैक कनेक्शन, कंट्रोलर प्रोग्रामिंग और चार्जिंग यूनिट टेस्टिंग का प्रत्यक्ष अभ्यास भी किया. प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक कार्यक्रम से पढ़ाने की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्र सीधे उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल सीख सकेंगे. कार्यक्रम के समापन पर प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये तथा भविष्य में उन्नत प्रशिक्षण आयोजित करने की सहमति भी बनी. तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के तेजी से बढ़ते बाजार को देखते हुए इस प्रकार के प्रशिक्षण से न केवल शिक्षण गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे.

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