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नदिया और मालदा में 18 अगस्त को मनाया जाता है स्वतंत्रता दिवस

Updated at : 18 Aug 2025 8:59 PM (IST)
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नदिया और मालदा में 18 अगस्त को मनाया जाता है स्वतंत्रता दिवस

जब पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, तब पश्चिम बंगाल के नदिया और मालदा जिले के कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां 18 अगस्त को तिरंगा फहराया जाता है और स्वतंत्रता का पर्व मनाया जाता है.

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जमुई . जब पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, तब पश्चिम बंगाल के नदिया और मालदा जिले के कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां 18 अगस्त को तिरंगा फहराया जाता है और स्वतंत्रता का पर्व मनाया जाता है. इस ऐतिहासिक तथ्य पर प्रकाश डालते हुए रविवार को जमुई स्थित व्यवहार न्यायालय के जीपी आवास परिसर में विधिशाला सह संवाद कक्ष में एक गंभीर विषय पर परिचर्चा आयोजित की गयी.कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात कुमार भगत ने की. उन्होंने कहा कि भारत में एक ऐसा भी जिला है, जहां 18 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. यह सुनकर लोगों को भले ही आश्चर्य लग रहे हो, लेकिन यह ऐतिहासिक सत्य है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस महज एक तिथि नहीं, बल्कि बलिदान, गौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है. 15 बनाम 18 अगस्त के प्रश्न पर खुली चर्चा से सच्चाई सामने आयेगी और राष्ट्रीय एकता को नयी ऊर्जा मिलेगी.

इतिहास से जुड़ा सच:

केकेएम कॉलेज, जमुई के स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो डॉ गौरी शंकर पासवान ने कहा कि 18 अगस्त भारतीय इतिहास का एक अनूठा और प्रेरणादायक अध्याय है. उन्होंने बताया कि वर्ष 1947 में रेडक्लिफ द्वारा किये गये सीमांकन में बंगाल के नदिया और मालदा जिले के राणाघाट, कृष्णा नगर, इंग्लिश बाजार और रटूआ जैसे हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र पाकिस्तान में शामिल कर दिये गये थे. इसके खिलाफ जनता ने प्रबल विरोध किया. इस पर लॉर्ड माउंटबेटन के निर्देश पर पुनः सीमांकन कर 17 अगस्त की आधी रात को भारत में शामिल किये जाने की घोषणा हुई और 18 अगस्त को तिरंगा फहराकर वहां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया.

क्या यह दूसरा स्वतंत्रता दिवस है

प्रो पासवान ने कहा कि यह घटना स्वतंत्रता दिवस की तिथि की एकरूपता पर गंभीर सवाल खड़ा करती है. उन्होंने सुझाव दिया कि या तो इस दिन को बंगाल का दूसरा स्वतंत्रता दिवस घोषित किया जाये या 15 अगस्त की ही मान्यता दी जाये, ताकि भविष्य की पीढ़ी सच्चे इतिहास से परिचित हो सके. उन्होंने यह भी कहा कि नदिया में इस ऐतिहासिक दिवस को पुनर्जीवित करने का श्रेय अंजन शुकुल को जाता है, जिन्होंने 1991 में भारत सरकार से 18 अगस्त को झंडोत्तोलन की अनुमति प्राप्त की थी.

18 अगस्त समिति का गठन

अर्थशास्त्र के सहायक प्राध्यापक श्री सरदार राम ने बताया कि बंगाल में 1998 में ””18 अगस्त समिति”” का गठन हुआ. इसके बाद से हर वर्ष इस दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 15 और 18 अगस्त के बीच की ऐतिहासिक दूरी को पाटना आवश्यक है.

इतिहासकारों और सरकार की जिम्मेदारी

वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रामचंद्र रवि ने कहा कि 18 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाना भारतीय इतिहास का एक चौंकाने वाला तथ्य है, जिससे आज की पीढ़ी अनजान है. उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि इस ऐतिहासिक विसंगति को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMIT KUMAR SINH

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By AMIT KUMAR SINH

AMIT KUMAR SINH is a contributor at Prabhat Khabar.

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