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1971 में भारतीय सैनिकों के अद्वितीय शौर्य के आगे 93 हजार पाक सैनिकों ने किया था सरेंडर

Updated at : 16 Dec 2024 10:11 PM (IST)
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1971 में भारतीय सैनिकों के अद्वितीय शौर्य के आगे 93 हजार पाक सैनिकों ने किया था सरेंडर

विजय दिवस के अवसर पर केकेएम कॉलेज के परिसर में सोमवार को बलिदान और वीरता का इतिहास विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गयी.

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जमुई. विजय दिवस के अवसर पर केकेएम कॉलेज के परिसर में सोमवार को बलिदान और वीरता का इतिहास विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गयी. मौके पर उपस्थित लोगों ने सबसे पहले 1971 युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उनकी आत्मा की शांति को भगवान से प्रार्थना की. मौके पर डॉ गौरी शंकर पासवान ने कहा कि विजय दिवस भारतीय सैन्य शक्ति का प्रतीक है. यह उन शहीदों और वीर योद्धाओं को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर एक नये राष्ट्र के निर्माण में योगदान दिया था. 16 दिसंबर हमें राष्ट्रीय एकता, साहस और बलिदान की प्रेरणा देता है. विजय दिवस भारतीय सैनिकों की अद्वितीय रणनीति का सुखद परिणाम है. वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध भारतीय सैनिकों के संकल्प, धैर्य, शौर्य व वीरता की कहानी है.

विजय दिवस भारतीय सेना की शौर्य गाथा

केकेएम कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष सह पूर्व एयर फोर्स सैनिक प्रो कैलाश पंडित ने कहा कि विजय दिवस वीर सैनिकों की शौर्य गाथा और अमर निशानी है. 1971 के भारत-पाक युद्ध में हमने पाकिस्तान को धूल चटाकर विजय प्राप्त की थी. हमारे वीर सैनिक सपूतों ने 93000 पाकिस्तानी सैनिकों को सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया था.

बांग्लादेश का जन्मदाता है भारत- डॉ अजीत

अर्थशास्त्र के सहायक प्राध्यापक प्रो सरदार राय ने कहा कि 1971 का युद्ध भारत के मानवाधिकारों की रक्षा, रणनीतिक क्षमता और पड़ोसी देशों की सहायता के प्रति केवल प्रतिबद्धता को दर्शाता है. भारत ने बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय पहचान और मान्यता दिलाने में सहायता की थी. असिस्टेंट प्रो डॉ अजीत कुमार भारती ने कहा कि 1971 का भारत-पाक युद्ध जीत नहीं थी, बल्कि एक राष्ट्र की जन्म की कहानी है, जो लोकतंत्र और समानता के लिए लड़ी गयी थी. भारत बांग्लादेश का जन्मदाता है किंतु आज बांग्लादेश अपने देश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को ही प्रताड़ित कर रहा है. हमें उसे सबक सिखाने की जरूरत है.

भारतीय सेना ने पाक सैनिकों को धूल चटा दी थी

इतिहास के विभागाध्यक्ष डॉ सत्यार्थ प्रकाश ने कहा कि विजय दिवस भारतीय सैनिक की वीरता की गाथा और सम्मान है. अंग्रेजी के विभागाध्यक्ष डॉ अनिंदो सुंदर पोले ने कहा कि विजय दिवस दुश्मन देश पाकिस्तान की हार और भारत की जीत का परिचायक है. पाकिस्तानी दुश्मनों ने 3 दिसंबर 1971 को भारत पर हमला कर भारत को परास्त करने का प्रयास किया था, किंतु भारतीय सैनिकों ने उसे ही धूल चटा दी. भारत के वीर सपूतों और शहीदों को मेरा सलाम और नमन है. मौके पर रवीश कुमार सिंह, सुशील कुमार, कृष्णा गिरी, बटेश्वर यादव, अरविंद यादव, कीर्तन सिंह, शैलेश कुमार सिंह सहित कई लोग उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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