स्वगणना अभियान के साथ सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में जुटा प्रशासन

Published by :PANKAJ KUMAR SINGH
Published at :26 Apr 2026 9:43 PM (IST)
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स्वगणना अभियान के साथ सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में जुटा प्रशासन

जिला पदाधिकारी श्री नवीन के नेतृत्व में प्रशासन न केवल लोगों को डिजिटल स्वगणना के लिए जागरूक कर रहा है, बल्कि जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी सक्रिय पहल कर रहा है.

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जमुई. भारत की जनगणना 2027 के तहत चल रहे स्वगणना अभियान को जिले में तेजी मिली है. जिला पदाधिकारी श्री नवीन के नेतृत्व में प्रशासन न केवल लोगों को डिजिटल स्वगणना के लिए जागरूक कर रहा है, बल्कि जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी सक्रिय पहल कर रहा है. जानकारी देते हुए डीपीआरओ डा मेनका कुमारी ने बताया कि इस क्रम में जनगणना प्रशिक्षण कोषांग के नोडल पदाधिकारी सह कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार और जिला कला संस्कृति पदाधिकारी विकेश कुमार ने उझंडी क्षेत्र एवं कागेश्वर स्थान का दौरा किया. यहां जनसंवाद के माध्यम से लोगों को स्वगणना पोर्टल की सरल प्रक्रिया की जानकारी दी गई और अधिक से अधिक भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया. साथ ही प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों के संरक्षण अभियान के प्रति भी लोगों को जागरूक किया गया. दौरे के दौरान प्रशासनिक टीम ने जिले के वरिष्ठ साहित्यकार गिरिजानंद मणि के आवास पर पहुंचकर उनसे शिष्टाचार भेंट की. इस अवसर पर उनके परिजनों को डिजिटल स्वगणना के महत्व से अवगत कराया गया, जिसके बाद उन्होंने उत्साहपूर्वक पोर्टल पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की. मुलाकात के दौरान साहित्यकार गिरिजानंद मणि की रचनात्मक धरोहर पर भी चर्चा हुई. जिसमें मणिमाला,प्रतिरोध, दृष्टिकोण, महाभारत की युद्ध कथा, बाल्मीकि क्या करें, टूटते जुड़ते रिश्ते और कबीराहा मरा नहीं जैसी कृतियों को जमुई की सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज बताया गया. मौके पर ज्ञान भारतम मिशन के तहत चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान पर भी विचार-विमर्श किया गया. प्रशासन की यह पहल जिले में बिखरी प्राचीन हस्तलिखित धरोहर को खोजकर संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. जिला प्रशासन ने सभी प्रबुद्ध नागरिकों, साहित्यकारों और मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे स्वगणना और पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान को जन आंदोलन बनाएं. प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी से ही जमुई की सांस्कृतिक पहचान को सहेजते हुए विकास की नई राह प्रशस्त की जा सकती है.

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