चरखा चला कर जिले की महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

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खादी भंडार भी बन रहा आत्मनिर्भर जमुई : भारतीय वस्त्र उद्योग में चरखे का अपना एक बहुत ही अहम स्थान है. पुरातन काल से ही जब इतने बड़े पैमाने पर वस्त्र उद्योग में मशीनरी की स्थापना नहीं की गयी थी तब से ही सड़कों पर सूत काटकर भारतीय अपने तन को ढंकते थे. आज जब […]

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खादी भंडार भी बन रहा आत्मनिर्भर

जमुई : भारतीय वस्त्र उद्योग में चरखे का अपना एक बहुत ही अहम स्थान है. पुरातन काल से ही जब इतने बड़े पैमाने पर वस्त्र उद्योग में मशीनरी की स्थापना नहीं की गयी थी तब से ही सड़कों पर सूत काटकर भारतीय अपने तन को ढंकते थे. आज जब आधुनिकता के इस दौर में चरखा का स्थान मशीनों में ले लिया है. तब भी जिले में कुछ महिलाएं ऐसी हैं जो इस पुरानी परिपाटी को आज भी जीवित बनाये हुए हैं और चरखे पर सूत काटकर वस्त्र तैयार कर रहे हैं. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ चरखा को अपना प्रमुख अस्त्र बनाया था. उसी चरखे से देसी उद्योग को एक नया आयाम मिला और जनमानस से गरीबी से लड़ने में एक अहम योगदान दिया. पर इस आधुनिक चकाचौंध में चरखा हमारे जीवन से काफी पीछे छुटता चला गया.
पर एकबार फिर चरखे की गूंज सुनाई पड़ने लगी है जमुई के विकास समिति अवार्ड खादी भंडार में महिलाएं चरखा चलाकर अपनी और अपने परिवार का भरण पोषण कर अपनी जीवन सवार रही हैं. इससे खादी भंडार भी आत्मनिर्भर बन रहा है. करीब दो दर्जन से अधिक महिलाएं प्रतिदिन चरखा पर सूट काट आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं.
महीने में पांच हजार तक हो जाती है कमाई
बताते चलें कि विकास समिति जमुई खादी भंडार में पूर्णोद्धार योजना के तहत संचालित सूत कटाई की शुरुआत 1 जनवरी 2017 से चालू हुआ अंबर चरखा और कटिया चरखा के द्वारा महिलाएं यहां सूत काटती हैं और अपने और अपने परिवार के भरण पोषण में सहयोग करती हैं . चरखा चला रही महिलाओं में सुलोचना देवी, सरस्वती देवी, सविता देवी, बेबी देवी मालती देवी,ललिता देवी, संगीता देवी, रूबी देवी, गीता देवी, रेनू देवी, लीला देवी, कंचन देवी ने बताया कि यहां के खादी भंडार की अपनी एक अलग पहचान है.
दूर-दूर से लोग यहां आते थे परंतु कुछ वर्षों से यह मृतप्राय सा हो गया था परंतु बीते वर्ष 2017 में इसका फिर से पूर्ण जन्म हुआ और एक बार पुनः इस जगह पर चरखे की मधुर ध्वनि फिर से सुनाई पड़ने लगी. इन महिलाओं ने बताया कि हम लोग एक दिन में 300 से 400 ग्राम सूत काट लेते हैं. जिससे कि हम लोगों की कमाई डेढ़ सौ से 170 तक प्रतिदिन हो जाती है. महीने में 4500 से 5000 तक तक हम लोग कमा लेते हैं. जिससे से हमारे घर के काम भी हो जाता हैं. बचे समय में हम सभी यहां आकर काम भी कर लेते हैं. इससे कि हमारे घर की स्थिति में भी एक सहयोग मिल जाता है.
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