जमुई : डायरिया से फिर एक बच्ची की मौत, दर्जनों आक्रांत

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सरकारी स्तर से नहीं हो रहा समाधान का प्रयास खैरा : प्रखंड क्षेत्र के कई गांव में इन दिनों डायरिया ने पांव पसार लिया है. वर्तमान में दो दर्जन से भी अधिक लोग डायरिया से आक्रांत हैं. प्रखंड के ढाब गांव में सोमवार देर रात डायरिया से एक बच्ची की मौत हो गयी. जिसके बाद […]

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सरकारी स्तर से नहीं हो रहा समाधान का प्रयास
खैरा : प्रखंड क्षेत्र के कई गांव में इन दिनों डायरिया ने पांव पसार लिया है. वर्तमान में दो दर्जन से भी अधिक लोग डायरिया से आक्रांत हैं. प्रखंड के ढाब गांव में सोमवार देर रात डायरिया से एक बच्ची की मौत हो गयी. जिसके बाद बीते दो दिनों में प्रखंड क्षेत्र में डायरिया से मरने वालों की संख्या दो हो गयी है. जबकि दर्जन भर अन्य लोग फिलवक्त डायरिया की चपेट में हैं. इनका इलाज अलग-अलग निजी अस्पतालों में किया जा रहा है.
ढाब निवासी जालो मांझी की चार माह की पुत्री को उल्टी व दस्त होने के बाद उसका इलाज निजी चिकित्सक द्वारा किया जा रहा था. परंतु बीते सोमवार की रात उसकी मौत हो गयी.
वहीं इसके अलावे धरम मांझी, धरम मांझी का एक वर्षीय पुत्र सन्नू कुमार, बैजू मांझी, बैजू मांझी का 10 वर्षीय पुत्र अनिल कुमार, शंकर रविदास की तीन वर्षीय पुत्री अंशु कुमारी, 65 वर्षीय सकिन्द्र रविदास, 12 वर्षीय सोनू कुमार, सूरज रविदास की ढाई वर्षीय पुत्री निशा कुमारी, पप्पू दास की ढाई वर्षीय पुत्री रिया कुमारी, करण कुमार, विपिन कुमार, सौरभ कुमार तथा पूतुल देवी डायरिया से पीड़ित हैं. इसके अलावे खड़हुई मुस्लिम मोहल्ला निवासी मो आलम की पत्नी जमीला खातून, खीरु तुरी का 11 वर्षीय पुत्री पातो कुमारी तथा खैरा महादलित
टोला निवासी संजीत कुमार वर्तमान में डायरिया से पीड़ित हैं तथा इन सबों का इलाज खैरा स्थित भिन्न भिन्न निजी अस्पतालों में किया जा रहा है. लोगों ने बताया कि उक्त गांव में स्थिति भयावह बनती जा रही है तथा सरकारी मदद के नाम पर अब तक लोगों को कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई गयी है. बताते चलें कि बीते सोमवार देर शाम प्रखंड क्षेत्र के भिमाइन निवासी 70 वर्षीय मां शराफत अंसारी की मौत डायरिया से हो गयी थी, तथा आठ लोगों को सदर अस्पताल रेफर किया गया था.
लोग पी रहे कीड़ा युक्त पानी
जहां एक तरफ सरकार व जनप्रतिनिधि चुनाव के समय लगातार तरह-तरह के चुनावी वादे करती है. परंतु ढाब गांव की वर्तमान तस्वीर उन वायदों की वास्तविक चित्रण करती है. बदहाली का आलम यह है कि गांव का एक कुआं जिससे गांव का कई परिवार अपनी प्यास बुझाता है. परंतु सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कुआं के पानी में कीड़ा हो चुका है. लोगों को वही कीड़ा युक्त पानी पीने को विवश होना पड़ रहा है.
लोगों ने बताया कि गांव स्थित कुआं में वर्षों से ब्लीचिंग पाउडर या चुना नहीं डाला गया है. उन्होंने बताया कि हम जब भी अस्पताल प्रशासन से ब्लीचिंग पाउडर की मांग भी करते हैं तो हमें नहीं दिया जाता है. वहीं इसके अलावे स्थानीय जनप्रतिनिधि भी बस चुनाव तक ही गांव आते हैं उन्हें भी हमारी कोई परवाह नहीं है. जिस वजह से हम लोग गंदा पानी पीने को विवश हैं. लोगों ने जल्द ही सरकारी मदद दिलाने की मांग की है.
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