जमुई मंडल कारा में जन्मा बच्चा पोलियो ग्रस्त, जेल में स्वास्थ्य जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
जमुई : मंडल कारा में कुछ माह पूर्व ही जन्मा बच्चा पोलियो ग्रस्त निकला. प्रभारी सिविल सर्जन डॉ सुरेंद्र प्रसाद सिंह को नियमित जांच के तहत शुक्रवार को मंडल कारा में एक पोलियो ग्रस्त बच्चा मिला. जानकारी देते हुए प्रभारी सीएस डॉ सिंह ने बताया कि विभाग के निर्देशानुसार जेल में बंद कैदियों के स्वास्थ्य […]
जमुई : मंडल कारा में कुछ माह पूर्व ही जन्मा बच्चा पोलियो ग्रस्त निकला. प्रभारी सिविल सर्जन डॉ सुरेंद्र प्रसाद सिंह को नियमित जांच के तहत शुक्रवार को मंडल कारा में एक पोलियो ग्रस्त बच्चा मिला. जानकारी देते हुए प्रभारी सीएस डॉ सिंह ने बताया कि विभाग के निर्देशानुसार जेल में बंद कैदियों के स्वास्थ्य जांच को लेकर मंडल कारा का औचक निरीक्षण किया गया. इस दौरान सभी वार्ड में घूम-घूम कर कैदी की स्वास्थ्य जांच करके आवश्यक दवा दी गयी. उन्होंने बताया कि इसी दौरान महिला वार्ड में पूर्व से कारा में बंद नक्सली सुमित्रा मरांडी का भी स्वास्थ्य जांच की गयी. इस दौरान उसके एक वर्ष के पुत्र सूरज कुमार को प्रारंभिक जांच में ही पोलियो की बीमारी होने की शिकायत मिली. हालांकि, इसकी विस्तृत जांच को लेकर प्रयोगशाला में उसके मल को विभाग द्वारा भेजा जायेगा. इस बाबत जेल अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि उक्त नक्सली बीते एक वर्ष से मंडल कारा में बंद है और वह चरकापत्थर निवासी लखन यादव की पत्नी है.
24 दिसंबर को हुई थी अस्पताल में भर्ती
मंडल कारा में कैद लखन यादव उर्फ लखन दा की पत्नी नक्सली कमांडर रह चुकी सुनीता मरांडी को बीते 24 दिसंबर, 2015 को जेल प्रशासन द्वारा प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुनीता ने ऑपरेशन के माध्यम से बच्चे को जन्म दिया था. सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड में भर्ती सुनीता मरांडी की सुरक्षा में महिला व सशस्त्र पुलिस बल तैनात किया गया था. साथ ही सदर अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गयी थी.
कौन है सुनीता मरांडी
सुनीता मरांडी चरकापत्थर थाना क्षेत्र के असरखो गांव की मुन्ना मरांडी की बेटी है, जो पहले नक्सली संगठन के महिला दस्ता की कमांडर थी. बाद में सुनीता नक्सली कमांडर लखन दा के साथ मिल कर एक अलग अपना संगठन बना लिया था. माओवादी संगठन ने इन दोनों को भगौड़ा घोषित कर दिया था. संगठन से अलग होकर लखन दा व सुनीता मरांडी ने कई घटनाओं को अंजाम देकर प्रशासन के लिए सिर दर्द बन गया था. 14 अप्रैल, 2015 को जमुई पुलिस ने इन दोनों को पटना से गिरफ्तार किया था. सुनीता के पति लखन दा भी जमुई मंडलकारा में कैदी है.
जेल में नियमित स्वास्थ्य जांच पर उठे सवाल
जिला मंडल कारा जमुई में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है. आलम यह है कि जेल में रह रहे कैदियों के स्वास्थ्य की न तो जेल प्रशासन को परवाह है ना ही अस्पताल प्रबंधन को. इसका खुलासा शुक्रवार को तब हुआ, जब जिले के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ सुरेंद्र प्रसाद जेल में कैदियों के स्वास्थ्य का औचक निरीक्षण करने पहुंचे. इस दौरान जेल में बंद महिला नक्सली सुनीता मरांडी के एक वर्षीय पुत्र में पोलियो का लक्षण पाया गया. इसके बाद जेल के अंदर कैदियों के जीवन के साथ हो रहे खिलवाड़ का पूरा पर्दाफाश हो गया. सवाल उठता है कि जहां एक ओर देश भर में यूनिसेफ और सरकार के प्रयास से लगातार कैंप लगाकर पोलियो उन्मूलन अभियान चलाया जाता है. इस अभियान में शहर, मोहल्ला, गांव, झुग्गी-झोपड़ी, चिमनी, महादलित टोला, चौक-चौराहे, वाहन पड़ाव, प्लेटफार्म आदि में बच्चों बच्चों को पोलियो की खुराक दी जाती है. वहीं, जेल के अंदर रह रहे नौनिहाल को पोलियो की खुराक क्यों नहीं पिलायी गयी.
सुनीता मरांड़ी के बच्चे में पाये गये पोलियो का लक्षण कि जेल के अंदर रह रहे कैदी के स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती है. सवाल उठता है कि समय-समय पर स्वास्थ्य जांच क्यों नहीं की जाती है. क्योंकि, जब भी किसी कैदी को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, उसकी स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर ही कराया जाता है. ऐसे में यह प्रश्न खड़ा होता है कि छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज में कैदियों के साथ क्यों उपेक्षित रवैया बरता जा रहा है. एक ओर सरकार के द्वारा जेल में बंद लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनको तरह-तरह की सुविधाएं देने के वायदे किये जाते हैं. वैसी परिस्थिति में जेल के अंदर रह रहे एक बच्चे में पोलियो के लक्षण नजर आना यह दिखाता है कि जेल प्रशासन किसी भी मायने में कैदियों के स्वास्थ्य को लेकर जवाबदेह नहीं है. बताते चलें कि उक्त बच्चे का जन्म 24 दिसंबर, 2015 को सदर अस्पताल में हुआ था.
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