बिहार में मौसमी फ्लू का वायरस म्यूटेट कर हुआ शक्तिशाली, अस्पतालों में बढ़ते मरीज को देख डॉक्टर भी हैरान

Updated at : 10 Sep 2021 8:17 AM (IST)
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बिहार में मौसमी फ्लू का वायरस म्यूटेट कर हुआ शक्तिशाली, अस्पतालों में बढ़ते मरीज को देख  डॉक्टर भी हैरान

पटना समेत राज्य के विभिन्न जिलों में इन दिनों सामान्य मौसमी वायरल फ्लू से पीड़ित होकर बच्चे बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं. इनमें से करीब पांच प्रतिशत गंभीर रूप से बीमार पड़ रहे हैं.

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साकिब, पटना. पटना समेत राज्य के विभिन्न जिलों में इन दिनों सामान्य मौसमी वायरल फ्लू से पीड़ित होकर बच्चे बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं. इनमें से करीब पांच प्रतिशत गंभीर रूप से बीमार पड़ रहे हैं. कई को तो निमोनिया तक हो रही है. ऐसे में डॉक्टरों को आशंका है कि हर इस बार मौसमी फ्लू का वायरस म्यूटेट कर अपना रूप बदल चुका है आैर पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली हो चुका है.

इसके कारण ही बच्चे इससे तेजी संक्रमित हो रहे हैं और लंबे समय तक बीमार रह रहे हैं. पीएमसीएच के वरीय माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रो डाॅ सत्येंद्र नारायण सिंह ने बताया कि फ्लू के वायरस में म्यूटेशन होता रहता है.यह अपना रूप बदलने में माहिर होता है. इसलिए आज तक मौसमी फ्लू की कोई कारगर वैक्सीन नहीं बन पायी.

एक दर्जन से ज्यादा प्रकार के फ्लू वायरस होते हैं. ऐसे में आशंका है कि मौसमी फ्लू का वायरस म्यूटेट कर नये रूप में सामने आया है. इसकी कौन-सी वेराइटी ने खतरनाक रूप लिया है, यह कहना मुश्किल है. ऐसे में इसकी जांच की जरूरत है. हालांकि, यह एक झोंका है एक से दो माह में यह खुद ही खत्म हो जायेगा.

पीएमसीएच से रिटायर्ड वरीय माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रो डॉ एसएन शर्मा कहते हैं कि वायरस थोड़े समय पर म्यूटेट करता है. मनुष्य के शरीर के सेल में जाने के बाद यह मल्टीप्लाइ करता है और एक वायरस से करोड़ों वायरस बनते हैं. इस क्रम में उसका रूप भी बदलता है. बड़ी संख्या में बच्चों का बीमार होना और खतरनाक लक्षणों को देखते हुए कहा जा सकता है कि मौसमी फ्लू का वायरस शक्तिशाली हो चुका है. ऐसे में इसकी जिनोमिक स्टडी करने की जरूरत है.

महावीर वात्सल्य अस्पताल, पटना में शिशु रोग विभाग के एचओडी डॉ बिनय रंजन कहते हैं कि इलाज के दौरान बच्चों में दिखने वाले लक्षण बताते हैं कि इस बार मौसमी फ्लू का वायरस म्यूटेट कर बेहद शक्तिशाली हो चुका है. यह आशंका इसलिए है कि पहले बुखार 101 से 102 डिग्री तक रहता था, अब यह 103 से 104 डिग्री तक रह रहा है.

बुखार पहले पारासिटामोल जैसी सामान्य दवाओं से उतर जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है. बुखार करीब एक सप्ताह तक रह रहा है, जो कि पहले ऐसा नहीं होता था. वायरस ने पहले की दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है.

पटना के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ विनय कुमार कहते हैं कि हर दो साल के बाद मौसमी फ्लू का वायरस म्यूटेट कर नये वैरिएंट के रूप में सामने आता है. इस बार वह शक्तिशाली रूप में सामने आया है. जो बच्चों को प्रभावित कर रहा है और गंभीर केस बढ़ रहे हैं. ऐसा इसलिए कि नये वैरिएंट के प्रति पहले से एंटीबॉडी उनके शरीर में नहीं है.

वायरल पीड़ित कुछ बच्चों में निमोनिया : सीएस

पटना में मौसमी वायरल फीवर के पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है. इनमें से कई निमोनिया के भी शिकार हो रहे हैं. इस बात को अब पटना की सिविल सर्जन ने भी माना है. गुरुवार को जिला प्रशासन ने बयान जारी कर कहा है कि बच्चों में वायरल निमोनिया भी पाया जा रहा है, जिनको पीकू वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है. इनकी संख्या बढ़ी है, लेकिन स्थिति अभी गंभीर नहीं है अौर घबराने की जरूरत नहीं है. अभी इनमें कोरोना की पुष्टि नहीं हो रही है.

बाढ़ग्रस्त इलाकों में सभी बच्चों की होगी स्क्रीनिंग

बिहार में बाढ़ग्रस्त जिलों के हर बच्चे की स्क्रीनिंग की जायेगी, ताकि उनके स्वास्थ्य का ब्योरा बन सके. इस काम मेंं स्वास्थ्य कर्मियों आैर आशा को लगाया जायेगा. सेविका-सहायिका भी स्क्रीनिंग में सहयोग करेंगी. आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ग्रस्त इलाकों वाले जिलों के डीएम को इस संबंध में निर्देश दिया है.

स्क्रीनिंग में अगर किसी बच्चों की तबीयत ठीक नहीं होने को लेकर संदेह होगा, तो उसे तुरंत अस्पताल भेजने का प्रबंध सिविल सर्जन के माध्यम से किया जायेगा. स्क्रीनिंग के दौरान सभी जानकारियों को नाम के साथ लिखना होगा. देर शाम सभी रिपोर्ट को ऑनलाइन विभाग को सौंप दिया जायेगा.

वोट से गश्ती तेज होगी, पहुंचेगा घर तक दवा

बाढ़ग्रस्त इलाकों में वोट से गश्ती तेज करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही स्क्रीनिंग के दौरान किसी को दवा की जरूरत पड़ती है, तो उसे घर तक दवा भी पहुंचाने का इंतजाम करने को कहा गया है.

Posted by Ashish Jha

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