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बिहार में सिर्फ लोन लेने को कई व्यापारी ले रहे जीएसटी नंबर, दायर नहीं करते रिटर्न

Updated at : 20 Aug 2021 1:01 PM (IST)
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बिहार में सिर्फ लोन लेने को कई व्यापारी ले रहे जीएसटी नंबर, दायर नहीं करते रिटर्न

राज्य में केंद्र और स्टेट जीएसटी के अंतर्गत निबंधित व्यापारियों की संख्या करीब पौने छह लाख है. इसमें दो लाख से ज्यादा व्यापारी ऐसे हैं, जो रेगुलर रिटर्न दायर नहीं करते या रिटर्न ही दायर नहीं करते हैं.

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कौशिक रंजन, पटना. राज्य में केंद्र और स्टेट जीएसटी के अंतर्गत निबंधित व्यापारियों की संख्या करीब पौने छह लाख है. इसमें दो लाख से ज्यादा व्यापारी ऐसे हैं, जो रेगुलर रिटर्न दायर नहीं करते या रिटर्न ही दायर नहीं करते हैं. इसकी मुख्य वजह टैक्स में हेरा-फेरी करने की प्रवृत्ति के अलावा सिर्फ लोन लेने के लिए जीएसटी नंबर लेना भी है.

मौजूदा प्रावधान के तहत बैंक या अन्य योजनाओं के अंतर्गत लोन लेने के लिए व्यापारियों को जीएसटी नंबर देना अनिवार्य होता है. इस वजह से बड़ी संख्या में व्यापारी सिर्फ जीएसटी नंबर इसी कारण से ले लेते हैं ताकि वे लोन ले सकें. बाद में वे जीएसटी रिटर्न दायर ही नहीं करते. कुछ व्यापारी कुछ रिटर्न दायर करने के बाद इसे देना बंद कर देते हैं. इन कारणों से राज्य रिटर्न नहीं दायर करने वाले व्यापारियों की संख्या बेवजह बढ़ जाती है.

इससे निजात पाने के लिए राज्य सरकार केंद्रीय जीएसटी काउंसिल को प्रस्ताव भेजने जा रही है. इससे संबंधित अनुरोध पत्र डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भेजेंगे. इसमें यह अनुरोध किया जायेगा कि सिर्फ लोन लेने के लिए जीएसटी नंबर की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया जाये.

अगर कोई व्यापारी लोन लेना चाहते हैं, तो वे अपने व्यवसाय से संबंधित विस्तृत जानकारी देकर भी सीधे लोन प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा एसएलबीसी की बैठक में भी इस मुद्दे को बैंकों के समक्ष रखा जायेगा और उनसे कहा जायेगा कि वे बिना जीएसटी नंबर लिये ही व्यापारियों को लोन प्रदान करें.

जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इस प्रस्ताव पर होगी चर्चा

जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में इस प्रस्ताव पर खासतौर से चर्चा होने के बाद इसके लागू होने की भी संभावना जतायी जा रही है. इस नये प्रावधान के लागू होने से राज्य में अकारण टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करने वालों की संख्या में कमी आयेगी. साथ ही इससे टैक्स नहीं देने वालों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करने में भी विभाग को काफी सहूलियत होगी.

फर्जी कंपनी या कागजात पर टैक्स इनपुट का गलत तरीके से लाभ लेने या टैक्स छिपाने या चोरी करने वालों पर कार्रवाई करने में आसानी होगी. कुछ व्यापारी कम आमदनी दिखा कर कम टैक्स दायर करते हैं, इस नये प्रावधान के लागू होने से इस पर अंकुश लग सकेगा. चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 120 फर्जी करदाताओं या जीएसटी चोरी करने वाले लोगों पर कार्रवाई की गयी है. इनसे करीब तीन हजार करोड़ के फर्जी लेनदेन का खुलासा हुआ है.

वाणिज्य कर मंत्री परिजनों से मिलेंगे

राज्य में इस बार कोरोना की दूसरी लहर में वाणिज्य कर विभाग के आठ पदाधिकारियों की मौत हो गयी है. इसमें सात अलग-अलग श्रेणी के पदाधिकारी और एक सहायक शामिल हैं. डिप्टी सीएम सह वाणिज्य कर मंत्री तारकिशोर प्रसाद इन सभी कर्मियों के घर पर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात करके उनका हाल-चाल जानेंगे.

इन कर्मियों का जिस जिला में घर होगा, वहां जाकर विभागीय मंत्री मुलाकात करेंगे. इस मुलाकात के दौरान संबंधित जिलों के डीएम भी साथ में होंगे. अलग किसी कर्मी के परिजन को कोई समस्या है, तो उसे तुरंत दूर किया जायेगा. परिजनों को सबल प्रदान करने के लिए यह प्रयास खासतौर से किया जा रहा है. इस तरह की पहल करने वाला वाणिज्य कर विभाग राज्य में पहला विभाग होगा.

Posted by Ashish Jha

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