hajipur news. आशा को प्रतिमाह 25 सौ रुपये मानदेय देने की मांग

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 07 Dec 2024 9:58 PM

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हड़ताल के दौरान हुए समझौते को लागू करने समेत अन्य मांगों को लेकर बिहार राज्य आशा एवं आशा फेसिलिटेटर संघ, जिला शाखा के बैनर तले शनिवार को प्रदर्शन किया गया

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हाजीपुर. हड़ताल के दौरान हुए समझौते को लागू करने समेत अन्य मांगों को लेकर बिहार राज्य आशा एवं आशा फेसिलिटेटर संघ, जिला शाखा के बैनर तले शनिवार को यहां प्रदर्शन किया गया. सदर अस्पताल परिसर से जुलूस निकालकर आशा हेल्थ वर्करों ने नारेबाजी करते हुए सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया. इसके बाद अस्पताल परिसर में सभा की गयी, जिसकी अध्यक्षता मीनू कुमारी ने की. सभा में संघ के जिला मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि आशा का काम लाभुकों को संस्थान स्तर तक पहुंचाना है. गाइडलाइन के अनुसार जो कार्य आवंटित है, उसके अलावे भी कई सामाजिक कार्यक्रमों में बिना प्रोत्साहन राशि के उनसे काम लिया जाता है. लेकिन, आयुष्मान कार्ड बनाने तथा भाव्या पोर्टल पर अपलोड करने जैसे तकनीक कार्य को अंजाम देने में वे सक्षम नहीं हैं. इसलिए हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उपकेंद्र पर डाटा ऑपरेटर या सीएचओ के माध्यम से इस कार्य को कराया जाये. आशा वर्कर केंद्र तक लाभुकों को पहुंचाने का काम करेंगी. बिहार चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला मंत्री राकेश कुमार सिंह ने कहा कि आशा हेल्थ वर्करों की गत हड़ताल के दौरान हुए समझौते के अनुसार राज्य निधि से एक हजार रुपये की बजाय 25 सौ रुपये देने और पारितोषिक शब्द को मानदेय में बदलने, तकनीकी कार्य के आदेश को वापस लेने समेत अन्य मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो बाध्य होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना होगा. मौके पर वरिष्ठ नेता राजेंद्र पटेल, राजेश रंजन, रामाशंकर भारती, वीणा कुमारी, रामशीला देवी, सुधा कुमारी, नीलम कुमारी, रेणु कुमारी, सुरेंद्र राय आदि ने विचार रखे.

सीएस को सौंपा मांगपत्र

सिविल सर्जन को सौंपे गये 13 सूत्री मांगपत्र में आंगनबाड़ी सेविकाओं की तरह आशा कार्यकर्ताओं को भी 65 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति, सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के सभी आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को दो बार उपस्थिति कार्यालय द्वारा बनाये जाने के आदेश को निरस्त करने, अश्विन पोर्टल से भुगतान शुरू होने से पूर्व के सभी बकाये राशि का भुगतान करने, आशा के भुगतान में व्याप्त भ्रष्टाचार कमीशनखोरी पर सख्ती से रोक लगाने, कोरोना काल की ड्यूटी के लिए सभी आशा व आशा फैसिलिटेटरों को 10 हजार रुपये कोरोना भत्ता देने, आशा फैसिलिटेटरों को 21 दिनों की जगह पूरे माह का भ्रमण भत्ता (एसवीसी) रोजाना पांच सौ रुपये की दर से भुगतान करने, आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, सामाजिक सुरक्षा योजना व पेंशन योजना का लाभ देने और तब तक के लिए रिटायरमेंट पैकेज के रूप में एकमुश्त दस लाख रुपये का भुगतान करने आदि मांगें शामिल थीं.

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