लॉकडाउन-2.0 : आओ सीख लें बहुत कुछ और, जी लें संयम की जिंदगी

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 16 Apr 2020 1:13 AM

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गोपालगंज : लॉकडाउन में घर से बाहर घूमने का मौका नहीं मिल रहा और न फील्ड में खेलने व रेस्टोरेंट में जाने का. फिर भी लॉकडाउन की तिथि बढ़ाने से बच्चों में खुशी है. उनके मन में तो बस यही है कि आओ सीख लें बहुत कुछ और, जी लें संयम व अनुशासन की जिंदगी. […]

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गोपालगंज : लॉकडाउन में घर से बाहर घूमने का मौका नहीं मिल रहा और न फील्ड में खेलने व रेस्टोरेंट में जाने का. फिर भी लॉकडाउन की तिथि बढ़ाने से बच्चों में खुशी है. उनके मन में तो बस यही है कि आओ सीख लें बहुत कुछ और, जी लें संयम व अनुशासन की जिंदगी. लॉकडाउन- दो शुरू हो जाने से उन्हें इसका मौका जो मिल गया है और वे इस मौके को गंवाना नहीं चाहते. वे चाहते हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ वे बहुत कुछ और सीख लें, जैसा कि वे लॉकडाउन में घरों में रह कर सीखते आये हैं. स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी के लिए वे संयम व अनुशासन का पाठ और पढ़ लें, जो वे इन दिनों पढ़ रहे हैं. शहर के सरेया मोहल्ले के राज, रिया, आस्था, गुल्लू, कृष व अमृत बताते हैं कि दादा-दादी से सीख भरी कहानियां सुनने का खूब मौका मिल रहा है, तो वहीं पापा-मम्मी से स्वस्थ जीवन जीने की कला सीखने का अवसर. पिहू, जिया, परी बतातीं हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई के साथ घर में मम्मी से खाना बनाने व कपड़ा कटाई-सिलाई और बुनाई सीखने का मौका मिल रहा है.

ऑनलाइन पढ़ाई का बढ़ा क्रेज, हुनरमंद बन रहीं बेटियां

लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई का क्रेज बढ़ा है, तो वहीं बेटियां भी हुनरमंद बन रही हैं. ब्लॉक रोड के रमेश कुमार बताते हैं कि लॉकडाउन में व्यवसाय चौपट होने समेत कई कीमतें चुकानी पड़ी हैं, लेकिन सच्चाई यह भी है कि जीवन है, तो ही ये सब कुछ है. ऐसे में लॉकडाउन बढ़ाना उचित निर्णय है. लॉकडाउन की तिथि बढ़ने से परिवार के मुखिया को भले ही परेशानी हो, लेकिन बच्चों के साथ बड़ों के लिए भी यह अच्छा है. घर पर बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई हो ही जा रही है, वहीं वे दादा-दादी व मम्मी-पापा से बहुत कुछ सीख रहे हैं. बेटियां मां से सीख कर हुनरमंद बन रही हैं, जो उनके भविष्य व खुशहाल जिंदगी के लिए जरूरी है. बच्चे ही नहीं बड़ों को भी इससे फायदा हुआ है. आज जितने ही एक साथ रहने का मौका मिल रहा है, उतना ही रिश्तों में मिठास घुलती जा रही है. रिश्तों की तल्खियां दूर हो रही हैं. फिजूलखर्ची रुकी है, तो वहीं कम खर्चे में परिवार की गाड़ी चलाने की समझ भी आयी है.

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