गोपालगंज में घनी आबादी के बीच बंजारी श्मशान में शव जलाने पर पटना हाईकोर्ट सख्त, DM से मांगा जवाब
Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 18 May 2026 6:29 PM
पटना हाईकोर्ट का फाइल फोटो
Gopalganj News: गोपालगंज के बंजारी चौक (वार्ड-15) स्थित घनी आबादी के बीच श्मशान में शव जलाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति राजीव रॉय की बेंच ने गोपालगंज डीएम और बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें और दाह संस्कार के लिए आबादी से दूर बेहतर स्थान चुनें. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रंजीत पांडेय द्वारा स्वास्थ्य और वायु प्रदूषण की दलीलें दिए जाने के बाद, कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई तय की है.
Gopalganj News(सत्येंद्र पांडेय): यह पूरा विवाद गोपालगंज शहर के वार्ड संख्या 15, बंजारी चौक के निकट स्थित मौजा भितभेरवा की भूमि से जुड़ा है. कुल 4 कट्ठा 11 धूर क्षेत्रफल वाली यह खुली भूमि वर्तमान में पूरी तरह से घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र में तब्दील हो चुकी है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस रिहायशी इलाके के बीचों-बीच शवों का दाह संस्कार किए जाने से स्थानीय नागरिकों और बच्चों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है.
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: दाह संस्कार के लिए बेहतर स्थान चुनें अधिकारी
सुनवाई के दौरान अदालत को उपलब्ध कराई गईं विभिन्न तस्वीरों और साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद माननीय न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अब अधिकारियों को इस मामले में सोचना होगा.
अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि संबंधित अधिकारी इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से देखें और यह सुनिश्चित करें कि दाह संस्कार के लिए रिहायशी इलाके से दूर किसी बेहतर स्थान का चयन किया जाए. इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि लोगों को यह एहसास दिलाने के लिए जन जागरूकता आवश्यक है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में शवों का दाह संस्कार वहां रहने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है.
कोर्ट ने इन मुख्य बिंदुओं को माना बेहद गंभीर
याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता रंजीत पांडेय ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण तकनीकी और स्वास्थ्य संबंधी पहलू रखे, जिन्हें कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया. उन्होंने कहा शवों के दाह संस्कार में भारी मात्रा में लकड़ी के उपयोग से उत्पन्न होने वाली आग और जहरीले धुएं से स्थानीय लोग त्रस्त हैं. साथ ही रिहायशी इलाके में धुएं के कारण चौबीसों घंटे दुर्गंध और भारी वायु प्रदूषण उत्पन्न हो रहा है. इसके चलते इलाके में रहने वाले अस्थमा (दमा) के मरीजों को प्रतिदिन जानलेवा कष्ट का सामना करना पड़ रहा है.वहीं घनी आबादी के बीच लगातार होने वाले दाह संस्कार से वहां रह रहे बच्चों, वृद्धों और अन्य नागरिकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
श्मशान घाट को स्थानांतरित करने की अपील, 16 जुलाई को अगली सुनवाई
अधिवक्ता रंजीत पांडेय ने कोर्ट को बताया कि समय के साथ-साथ बंजारी का यह क्षेत्र बेहद घनी आबादी वाला बन गया है, लेकिन संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने आज तक इस श्मशान घाट को शहर से बाहर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने के बारे में विचार नहीं किया. इसके कारण स्थानीय नागरिक नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.
अब आगे क्या?
पटना हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपालगंज के डीएम और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दो सप्ताह के भीतर अपना-अपना हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है, जिसकी एक प्रति याचिकाकर्ता के वकील को सौंपी जाएगी. इसके बाद याचिकाकर्ता पक्ष को भी अगले दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करना होगा. पक्ष रखने के लिए मिले इस करीब 15 दिनों के मोहलत के बाद, माननीय अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 जुलाई, 2026 की तिथि मुकर्रर की है.
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