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gopalganj news : फाइलों में कैद महादलितों की तकदीर, वायदे नहीं बने मरहम

Updated at : 01 Nov 2025 8:53 PM (IST)
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gopalganj news : फाइलों में कैद महादलितों की तकदीर, वायदे नहीं बने मरहम

gopalganj news : सदर विस क्षेत्र. विशुनपुर तटबंध पर दम तोड़ रहा महादलितों के विकास का सपना, केवल वोट के लिए आते हैं नेताजीगंडक नदी के कटाव से उजड़ कर दो दशक से बांध पर झोंपड़ी डाल कर रह रहे आठ सौ परिवार

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गोपालगंज. सुबह के आठ बजे हैं. शनिवार को आसमान में बादलों का कब्जा है. विशुनपुर बांध पर गंडक नदी की लहरों से टकरा कर आ रही पुरवा हवा व सावन जैसी फुहारों के बीच सिहरन भर रही थी.

गोपालगंज शहर से 12 किमी उत्तर विशुनपुर बांध की दोनों तरफ लगभग आठ सौ महादलित परिवार के लोग बसे हुए हैं. यहां से गोपालगंज-बेतिया को जोड़ने वाला हाइवे गुजरा है, जिस पर वाहन फर्राटे भर रहे थे. यहां से पतहरा तक महादलित बस्ती के बच्चे बारिश की फुहारों में नंग-धड़ंग खेल में मस्त थे. थोड़े ही आगे बढ़ने पर कौशिली देवी अपनी झोंपड़ी में बैठकर सावन जैसी फुहारों के रुकने का इंतजार कर रही थीं. उनके बगल में चौकी व खटिया लगा हुआ था, जिसके नीचे पांच-छह की संख्या में बकरियां थीं. पूछा गया कि क्या आप लोग इसी में रहते हैं, तो उनका दर्द छलक पड़ता है. 10-12 फुट में बनी झोंपड़ी में खाना बनाने से लेकर सोने तक का इंतजाम है. मर्द लोग खाकर मजदूरी करने चले गये हैं. पानी रुके, तो बकरियों को लेकर खेतों में काम करने जायें. बगल की झोंपड़ी में बैठी कलावती देवी ने कहा कि इसी झोंपड़ी में बेटा-बहू व दो बच्चों के साथ रात गुजारना पड़ता है. पूछा गया कि सांप-बिच्छू का डर नहीं लगता? कलावती ने कहा कि अब तो सांप-बिच्छू, जंगली जानवरों के बीच रहने की आदत हो गयी है. सरकार से हमलोगों को बस बिजली की सुविधा मिली है. पहले बिजली का पैसा भरते थे. अब फ्री हो गयी है. राशन मिलता है. पांच किलो के बदले चार किलो के हिसाब से मिल जाता है. उससे काम नहीं चलता है. दिन भर मेहनत-मजदूरी कर 50 रुपये किलो चावल, आटा खरीदकर खाना पड़ता है. अगर मजदूरी नहीं मिली, तो उस दिन घर का चूल्हा ठंडा ही रहता है. हर घर की यही दास्तां है. दो दशक पहले रामपुर टेंगराही, धर्मपुर से नदी के कटाव से बेघर होने के बाद यहां आकर पॉलीथिन के नीचे जीवन की शुरुआत की. अब झोंपड़ी बन गयी है. लगभग आठ सौ परिवार हैं. यहां मौजूद संदेश यादव ने कहा कि सरकार की फाइलों में इनकी तकदीर कैद है. वहां से बाहर योजनाएं निकले, तब न इनके पास तक विकास पहुंचे. रामायण मुसहर व जितेंद्र मुसहर ने कहा कि हर चुनाव में नेताजी लोग आते हैं. चुनाव के बाद यहां की तस्वीर को बदल देने का भरोसा देते हैं. उनके कहने पर वोट दे देते हैं. उसके बाद नेताजी का दर्शन नहीं हो पाता.

80 लोगों को मिला पर्चा, पर आठ वर्षों में नहीं मिला कब्जा

गंडक नदी के बांध पर बसे 80 लोगों को बगल के गांव बरई पट्टी में सरकारी जमीन पर बसने के लिए पर्चा मिला. वर्ष 2017 में पर्चा तो मिल गया, लेकिन आठ वर्षों में प्रशासन इनको आवंटित जमीन पर कब्जा तक नहीं दिला सका है. यहां इंद्रासन मुसहर बताते हैं कि जिस जमीन का पर्चा मिला है, उसपर वहां के दबंगों का कब्जा है. हमलोग जायेंगे, तो मारकर भगा दिया जायेगा. डर के कारण कोई नहीं जा सका. प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गयी.

बांध से फिर उजड़ने का मंडरा रहा खतरा

सरकार ने तटबंधों को मजबूत करने के लिए पक्कीकरण कराने के लिए राशि का आवंटन कर दिया हैै. चुनाव के बाद उसपर काम शुरू होने वाला है. जब सड़क का पक्कीकरण करने का काम शुरू होगा, तो इन पीड़ितों को फिर से उजड़ना पड़ेगा. राजू मुसहर ने कहा कि दो-तीन सौ रुपये में एक बांस मिलता है. दो थुनी लगाने में एक बांस खत्म हो जायेगा. अब उजाड़ा गया, तो फिर बसने के लिए हर परिवार को कम से कम 30 से 40 हजार रुपये खर्च होगा. इसकी चिंता सता रही है.

आठ सौ परिवार में से एक को मिला 10 हजार का लाभ

महिलाओं को रोजगार के लिए सरकार की ओर से हाल ही में 10-10 हजार रुपये जीविका के जरिये दिया गया. यहां बैठी रमावती देवी, कुमुद देवी, रघुनी देवी ने कहा कि हम लोगों को नहीं मिला. इस बस्ती में महज एक परिवार को 10 हजार की राशि मिली है. सरकार की इस योजना के लिए कई बार लोग आधार कार्ड, फोटो व कुछ पैसा भी ले गये. लेकिन सरकार की राशि हम लोगों तक नहीं पहुंची. कोई सांसद, विधायक, मंत्री यहां पूछने भी नहीं आया है कि हमारी क्या समस्या है. हम लोगों को पैसा मिलता, तो अपना रोजगार खड़ा करते.

महादलितों के उत्थान की योजनाएं गुम

-महादलित बस्ती में आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं

-सरकारी स्कूल में पढ़ने नहीं जाते बच्चे-अधिकतर बुजुर्गों को नहीं मिल पाया पेंशन का लाभ

-जमीन के अभाव में आवास का नहीं मिल पा रहा लाभ-आठ सौ परिवार के लिए एक भी शौचालय का इंतजाम नहीं

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH KUMAR

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SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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