कालाजार व पीकेडीएल के संदिग्ध मरीजों की ओपीडी में की जायेगी लाइन-लिस्टिंग, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने कहा, कालाजार मरीजों की संख्या में आयी गिरावट
Published by : GOVIND KUMAR Updated At : 30 Jun 2025 5:23 PM
गोपालगंज. जिले में कालाजार और पीकेडीएल (पोस्ट कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस) के उन्मूलन को बनाये रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ाते हुए एक नयी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है.
गोपालगंज. जिले में कालाजार और पीकेडीएल (पोस्ट कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस) के उन्मूलन को बनाये रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ाते हुए एक नयी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. इस रणनीति के तहत अब जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों की ओपीडी में आने वाले संभावित मरीजों की पहचान की जायेगी और उनका नाम पैसिव केस डिटेक्शन (पीसीडी) रजिस्टर में दर्ज किया जायेगा. इस संबंध में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुषमा शरण ने पत्र जारी कर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सहित सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये हैं. उन्होंने बताया कि कालाजार उन्मूलन लक्ष्य को बनाये रखने के लिए संभावित मरीजों की समय पर पहचान और सतत निगरानी बेहद जरूरी है. नयी व्यवस्था के तहत सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक नामित कर्मी तैनात किया जायेगा, जो ओपीडी रजिस्टर से संभावित मरीजों की जानकारी लेकर नियमित रूप से पीसीडी रजिस्टर में प्रविष्टि करेगा. मरीजों का नाम, पता, लक्षण एवं अन्य जरूरी विवरण लाइन लिस्टिंग के माध्यम से दर्ज किया जायेगा, जिससे समय पर उपचार और निगरानी संभव हो सकेगी. डॉ. शरण ने बताया कि यह पहल न केवल मरीजों की समय रहते पहचान में सहायक होगी, बल्कि इलाज की गुणवत्ता व कालाजार उन्मूलन अभियान को भी मजबूती देगी. जिले में पिछले वर्षों की तुलना में कालाजार के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गयी है. वर्ष 2025 में अब तक केवल 16 मरीज सामने आये हैं, जिनमें नौ वीएल (विसरल लीशमैनियासिस) तथा सात पीकेडीएल के हैं. उन्होंने बताया कि गोपालगंज जैसे जगहों में कालाजार का ऐतिहासिक प्रभाव रहा है, लेकिन हालिया प्रयासों से इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है. इसके बावजूद निगरानी और सतर्कता बरकरार रखना अत्यंत आवश्यक है. यह नयी रणनीति अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकती है.
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