ePaper

gopalganj news : बौद्धिक योद्धा बनकर वैश्विक चुनौतियों से लड़ने को तैयार हों छात्र : कुलपति

Updated at : 03 Jan 2026 9:26 PM (IST)
विज्ञापन
gopalganj news : बौद्धिक योद्धा बनकर वैश्विक चुनौतियों से लड़ने को तैयार हों छात्र : कुलपति

gopalganj news : एबीवीपी के 67वें प्रांतीय अधिवेशन में शिक्षा, मूल्य व राष्ट्र निर्माण पर हुआ व्यापक विमर्शजब तक इस देश में सनातन और हिंदू मूल जीवित रहेगा, तब तक लोकतंत्र भी सशक्त रहेगा

विज्ञापन

gopalganj news : गोपालगंज. शहर के मिंज स्टेडियम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) उत्तर बिहार का 67वां प्रांतीय अधिवेशन राष्ट्रवादी विचार, शैक्षणिक चिंतन और संगठनात्मक संवाद के वातावरण में संपन्न हुआ.

मिंज स्टेडियम और सुशील मोदी सभागार परिसर में आयोजित चार दिवसीय इस अधिवेशन के पहले दिन उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित बौद्धिक सत्रों में शिक्षा व्यवस्था, मूल्यबोध, सामाजिक संतुलन और छात्र जीवन की भूमिका पर गंभीर मंथन किया गया. विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने शिक्षा को केवल रोजगार से जोड़कर देखने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाये और राष्ट्र निर्माण में छात्रों की भूमिका को रेखांकित किया. उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता और मुख्य अतिथि के रूप में जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो डॉ परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति ने अपने अनुभव और शोध के आधार पर कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन संभव है. उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार दिलाना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है, जो अर्थशास्त्र, विज्ञान और तकनीक को समझने के साथ-साथ देश के मूल्यों को भी आत्मसात करें.

उन्होंने आरएसएस के पांच मंत्रों और एबीवीपी के ””””विजन पंच परिवर्तन”””” का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब की भावना और नागरिक कर्तव्यों पर संगठन के कार्यों को रेखांकित किया. उन्होंने रामायण, महाभारत और वेदों का भी जिक्र किया और बताया कि संगठन एक साथ रहकर एक राष्ट्र का निर्माण कर रहा है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि शिक्षा एवं संस्कृति मंत्रालय को एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि देश की सांस्कृतिक चेतना को मजबूती मिल सके. कुलपति ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि वर्ष 1822 में भारत विश्व की लगभग 23 प्रतिशत जीडीपी का भागीदार था. मुगल काल में अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, फिर भी विश्व की एक चौथाई अर्थव्यवस्था भारत के पास थी. उन्होंने कहा कि जब तक इस देश में सनातन और हिंदू मूल जीवित हैं, तब तक लोकतंत्र भी सशक्त रहेगा.

मंच पर प्रांत के प्रदेश अध्यक्ष डॉ विवेकानंद तिवारी, स्वागत समिति के मंत्री संदीप गिरी, राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र कुमार सोलंकी, स्वागत संयोजक मुकुल कुमार शर्मा और स्वागत समिति अध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार की उपस्थिति रही. उद्घाटन सत्र में परिषद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संगठन की वैचारिक दिशा और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि छात्र संगठन के रूप में एबीवीपी ने हमेशा राष्ट्र और समाज के हित में अपनी भूमिका निभायी है.

शिक्षा को आत्मविकास और समाज सेवा का माध्यम बनाएं : डॉ विवेकानंद

बौद्धिक सत्र को संबोधित करते हुए प्रांत के प्रदेश अध्यक्ष डॉ विवेकानंद तिवारी ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत कभी विश्वगुरु था. उन्होंने कहा कि नौ जुलाई, 1949 के बाद देश में ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण की शुरुआत हुई, लेकिन समय के साथ शिक्षा का उद्देश्य सीमित होता चला गया. गुलामी के प्रभाव से हमारी शैक्षणिक चेतना कमजोर पड़ी, जिसका असर आज भी देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि एबीवीपी इस कमी को दूर करने के लिए ज्ञान, सेवा और राष्ट्र के भाव के साथ कार्य कर रही है. परिषद का वैचारिक सूत्र ””””ज्ञान-शिव-एकता”””” केवल नारा नहीं, बल्कि छात्र जीवन को दिशा देने वाला मंत्र है. डॉ तिवारी ने परिषद के पूर्व प्रेरक यशवंतराव को स्मरण करते हुए कहा कि संगठन की नींव एक शिल्पकार की तरह गढ़ी गयी थी, जिसका प्रभाव आज भी परिषद की कार्यशैली में दिखायी देता है. उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे शिक्षा को आत्मविकास और समाज सेवा का माध्यम बनाएं.

छात्रों का भविष्य, कर्तव्यबोध और सामाजिक जिम्मेदारी समझे : संदीप गिरी

सत्र में संदीप गिरी ने परिषद द्वारा चलाये गये विभिन्न अभियानों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि कोविड काल में जब छात्र परिसरों से दूर हो गये थे, तब ””””सेल्फी विद कैंपस”””” और ””””परिषद चलो”””” जैसे अभियानों ने छात्रों को संगठन से जोड़े रखा. उन्होंने कहा कि एबीवीपी केवल शैक्षणिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य, कर्तव्यबोध और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर भी सक्रिय भूमिका निभाती है. उन्होंने परिषद द्वारा तैयार एक प्रस्ताव का भी जिक्र किया, जिसे मूल्यबोध में आ रही गिरावट को लेकर संबंधित मंचों पर भेजा गया है.

बिहार को संघर्ष और लोकतांत्रिक चेतना की भूमि : शर्मा

स्वागत संयोजक मुकुल कुमार शर्मा ने सामाजिक असंतुलन की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि वर्ष 2004 में दिया गया क्षेत्रीय असमानता का नारा आज भी प्रासंगिक है. बीते दो दशकों में व्यवस्था निर्माण के प्रयास हुए हैं, लेकिन अब आवश्यकता एक सुव्यवस्थित और संतुलित समाज की है. उन्होंने कहा कि इस दिशा में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. वक्ताओं ने बिहार को संघर्ष और लोकतांत्रिक चेतना की भूमि बताते हुए कहा कि यहीं से लोकतांत्रिक आंदोलनों की मजबूत नींव पड़ी. परिषद के प्रतिनिधियों ने कहा कि आज संगठन देशभर में लाखों कार्यकर्ताओं के साथ सक्रिय है और छात्रों में ‘जॉब ओरियेंटेड’ सोच के बजाय ‘सर्विस ओरियेंटेड’ दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास कर रहा है.

राष्ट्रीयता की बात आने पर आगे रहता है अभाविप : सोलंकी

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने विद्यार्थी परिषद के इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रीयता की बात आती है, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता सबसे आगे रहते हैं. कार्यक्रम में सदर विधायक सुभाष सिंह, बैकुंठपुर विधायक मिथिलेश तिवारी, एमएलसी पप्पू सिंह, विनोद सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में परिषद कार्यकर्ता उपस्थित रहे. अधिवेशन के दौरान विभिन्न सत्रों में विचार-विमर्श का सिलसिला जारी रहा. समापन पर संदीप गिरी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सत्र की समाप्ति की घोषणा की.

ध्वजारोहण के साथ अधिवेशन की हुई शुरुआत

मिंज स्टेडियम एवं सुशील मोदी सभागार परिसर में आयोजित तीन दिवसीय इस अधिवेशन की शुरुआत सुबह ध्वजारोहण के साथ हुई. उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता जेपी विश्वविद्यालय, छपरा के प्रो परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने की. मंच पर डॉ विवेकानंद तिवारी, संदीप गिरी, एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार सोलंकी, मुकुल कुमार शर्मा तथा डॉ अरविंद कुमार आसीन उपस्थित रहे.

संगठन, शिक्षा और मूल्यबोध पर हुआ बौद्धिक विमर्श

उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित बौद्धिक सत्र में शिक्षा व्यवस्था, मूल्यबोध और छात्र भविष्य को लेकर गहन विमर्श हुआ. डॉ विवेकानंद तिवारी ने कहा कि भारत कभी विश्वगुरु रहा है, लेकिन गुलामी के बाद हमारी शैक्षणिक चेतना कमजोर हुई. एबीवीपी ज्ञान, सेवा और राष्ट्रभाव के साथ इस कमी को दूर करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने परिषद के वैचारिक सूत्र ””””ज्ञान–शील–एकता”””” को छात्र जीवन का मार्गदर्शक मंत्र बताया और संगठन के पूर्व प्रेरक यशवंतराव के योगदान को स्मरण किया.

अभाविप के कार्यक्रम में नहीं पहुंचे डिप्टी सीएम, छायी निराशा

अभाविप के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी थे. शीतलहर व कोहरा के कारण हेलिकॉप्टर के नहीं उड़ने के कारण उनका कार्यक्रम रद्द हो गया, जिससे बिहार के 20 जिलों से आये अभाविप के कार्यकर्ताओं में निराशा दिखी. पूरे दिन डिप्टी सीएम के नहीं आने का चर्चा कार्यक्रम स्थल पर छाया रहा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SHAILESH KUMAR

लेखक के बारे में

By SHAILESH KUMAR

SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन