गोपालगंज में टूटेगा मिथक या बनेगा नया इतिहास, फैसला कल

Updated at : 02 Jun 2024 10:07 PM (IST)
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Lawrence Bishnoi

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के गृह जिला गोपालगंज में लोकसभा चुनाव के परिणाम का सभी को बेसब्री से इंतजार है. सबकी निगाहें गोपालगंज सुरक्षित संसदीय सीट पर आनेवाले परिणाम पर टिकी हुई है.

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गोपालगंज. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के गृह जिला गोपालगंज में लोकसभा चुनाव के परिणाम का सभी को बेसब्री से इंतजार है. सबकी निगाहें गोपालगंज सुरक्षित संसदीय सीट पर आनेवाले परिणाम पर टिकी हुई है. यहां का चुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि यहां 44 साल से एक मिथक चला आ रहा है, जिसमें अबतक लगातार दूसरी बार कोई सांसद नहीं बना है. ऐसे में इस चुनाव परिणाम में मिथक टूटेगा या फिर नया इतिहास बनेगा, इसका फैसला चार जून को हो जायेगा. इस बार यहां आर-पार की लड़ाई है. वोट प्रतिशत भी पिछली बार 2019 से 3.2 प्रतिशत घटा है. महिलाओं ने सर्वाधिक वोट 58 प्रतिशत डाले हैं. यहां वर्तमान जेडीयू के सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ आलोक कुमार सुमन एनडीए की ओर से हैं, तो महागठबंधन ने वीआइपी कोटे से सीट देकर गैस एजेंसी के संचालक युवा व्यवसायी प्रेमनाथ चंचल पासवान को उम्मीदवार बनाया था. दोनों के बीच कड़ा मुकाबला कहा जा रहा है. कुल 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. बसपा, एआइएमआइएम ने भी इस बार चुनाव लड़ा है. छह विस क्षेत्र वाले इस संसदीय सीट पर आनेवाला परिणाम विधानसभा चुनाव के लिए नया समीकरण बनायेगा. गोपालगंज संसदीय सीट के अंतर्गत छह विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें गोपालगंज, कुचायकोट, भोरे, हथुआ, बरौली और बैकुंठपुर विस क्षेत्र शामिल हैं. दो सीटों पर आरजेडी के विधायक हैं, जबकि चार सीटों में दो-दो सीटों पर बीजेपी व जेडीयू के विधायक हैं. उत्तर प्रदेश के देवरिया और कुशीनगर जिले से सटा गोपालगंज गंडक नदी के किनारे बसा है. राजद सुप्रीमो का गृह जिला होने के बावजूद संसदीय चुनाव में 2005 से यह जिला एनडीए का गढ़ माना जाता है. दरअसल, 2005 में गोपालगंज संसदीय सीट सुरक्षित हुई. उस वक्त से एनडीए के कब्जे में यह सीट है. गोपालगंज लोकसभा चुनाव का एक मिथक है. 1973 में सारण से अलग होकर जिला बना. वर्ष 1980 के बाद यहां दोबारा कोई सांसद नहीं बना. कांग्रेस का गढ़ होने के मिथक को 1984 में निर्दलीय काली प्रसाद पांडेय ने नगीना राय को हरा कर तोड़ा था. इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति लहर भी कांग्रेस की डूबती नैया को नहीं बचा सकी. जेल में रहते हुए बाहुबली काली प्रसाद पांडेय ने निर्दलीय प्रत्याशी बनकर जीत हासिल की थी. आज काली प्रसाद पांडेय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं. 2014 में बीजेपी के जनक राम कांग्रेस के पूर्णमासी राम और जदयू के अनिल राम को हराकर सांसद बने थे. 2019 में राजद के सुरेंद्र महान को हराकर एनडीए प्रत्याशी डॉ आलोक कुमार सुमन सांसद बने हैं.

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