गोपालगंज: एमडीएम में लापरवाही अब पड़ेगी भारी, 11 बजे तक ऑनलाइन हाजिरी नहीं तो प्रधानाध्यापक पर होगी कार्रवाई
गोपालगंज में मध्याह्न भोजन योजना की निगरानी को सख्त कर दिया गया है. सभी सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को अब प्रत्येक कार्य दिवस पर सुबह 11 बजे तक 'ई-शिक्षाकोष' ऐप पर छात्रों की उपस्थिति और एमडीएम लाभान्वित बच्चों की संख्या अनिवार्य रूप से ऑनलाइन दर्ज करनी होगी. निर्धारित समय के बाद एंट्री मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
Gopalganj News: सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (MDM) योजना की निगरानी को अब और अधिक सख्त कर दिया गया है. शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिले के सभी प्राथमिक व मध्य सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक (HM) और प्रभारी प्रधानाध्यापक अब 'ई-शिक्षाकोष' मोबाइल ऐप के नए वर्जन 3.6.0 के जरिए प्रत्येक कार्य दिवस में सुबह 11:00 बजे तक छात्रों की उपस्थिति और मध्याह्न भोजन से लाभान्वित बच्चों की संख्या अनिवार्य रूप से ऑनलाइन दर्ज करेंगे. निर्धारित समय के बाद एंट्री मिलने पर संबंधित प्रधानाध्यापक के विरुद्ध विभागीय नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
एमडीएम डीपीओ ने जारी किया सख्त निर्देश
एमडीएम डीपीओ लखींद्र दास ने बताया कि मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय के निर्देशानुसार जिले के सभी विद्यालयों के एचएम को तत्काल अपने मोबाइल में 'ई-शिक्षाकोष' ऐप का नया वर्जन 3.6.0 अपडेट करने का निर्देश दिया गया है. सभी प्रधानाध्यापकों को प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से पहले छात्रों की वास्तविक उपस्थिति तथा एमडीएम से लाभान्वित बच्चों का आंकड़ा पोर्टल पर दर्ज करना सुनिश्चित करना होगा.
देर से एंट्री करने पर तय होगी जवाबदेही
डीपीओ ने कहा कि विभाग ने यह साफ कर दिया है कि यदि किसी विद्यालय से सुबह 11:00 बजे के बाद छात्रों की उपस्थिति दर्ज होती है, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा. ऐसे मामलों में संबंधित एचएम के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारी भी इसकी नियमित मॉनिटरिंग करेंगे.
पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी आंकड़ों पर रोक के लिए नई व्यवस्था
शिक्षा विभाग के अनुसार, ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अब छात्रों की दैनिक उपस्थिति और मध्याह्न भोजन से लाभान्वित बच्चों का आंकड़ा एक साथ प्रदर्शित होगा. इससे वास्तविक उपस्थिति के अनुरूप एमडीएम वितरण की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव हो सकेगी. विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से फर्जी आंकड़ों पर लगाम लगेगी, योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और विद्यालयों की जवाबदेही तय की जा सकेगी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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