PHOTOS : कभी शिक्षा का मंदिर, आज बदहाली की मार...तस्वीरों में देखें 93 साल पुराने इस हाई स्कूल की हकीकत

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वर्ष 1932 में स्वतंत्रता सेनानी बाबू महादेव राय द्वारा स्थापित जी.ए. हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज का यह मुख्य गेट आज भी उसके गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है. हालांकि, गेट और आसपास की जर्जर स्थिति यह संकेत देती है कि कभी क्षेत्र का प्रमुख शिक्षण संस्थान रहा यह विद्यालय अब रखरखाव और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है.
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जीए हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज

वर्ष 1932 में स्वतंत्रता सेनानी बाबू महादेव राय द्वारा स्थापित जी.ए. हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज का यह मुख्य गेट आज भी उसके गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है. हालांकि, गेट और आसपास की जर्जर स्थिति यह संकेत देती है कि कभी क्षेत्र का प्रमुख शिक्षण संस्थान रहा यह विद्यालय अब रखरखाव और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है.

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स्कूल परिसर में जगह-जगह जमा पानी विद्यालय की बदहाल व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है. हल्की बारिश के बाद भी परिसर में जलजमाव होने से छात्रों को कक्षाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर दिन फिसलने और दुर्घटना का खतरा बना रहता है. शिक्षा के इस ऐतिहासिक केंद्र की ऐसी स्थिति स्थानीय लोगों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है.
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स्कूल के गेट पर जमा बारिश का पानी (फोटो-संजय अभय)

स्कूल परिसर में जगह-जगह जमा पानी विद्यालय की बदहाल व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है. हल्की बारिश के बाद भी परिसर में जलजमाव होने से छात्रों को कक्षाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर दिन फिसलने और दुर्घटना का खतरा बना रहता है. शिक्षा के इस ऐतिहासिक केंद्र की ऐसी स्थिति स्थानीय लोगों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है.

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विद्यालय परिसर में लगा चापाकल लंबे समय से बदहाल स्थिति में है. स्कूल में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. शिक्षा के इस ऐतिहासिक संस्थान में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
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स्कूल कैंपस में खराब पड़ा चापाकल (फोटो-संजय अभय)

विद्यालय परिसर में लगा चापाकल लंबे समय से बदहाल स्थिति में है. स्कूल में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. शिक्षा के इस ऐतिहासिक संस्थान में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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विद्यालय परिसर में छात्राओं के लिए बना शौचालय लंबे समय से बंद पड़ा है. शौचालय के मुख्य द्वार पर ताला लटका होने के कारण छात्राओं को आवश्यक सुविधा नहीं मिल पा रही है. बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
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प्लस टू स्कूल में बंद पड़ा शौचालय (फोटो-संजय अभय)

विद्यालय परिसर में छात्राओं के लिए बना शौचालय लंबे समय से बंद पड़ा है. शौचालय के मुख्य द्वार पर ताला लटका होने के कारण छात्राओं को आवश्यक सुविधा नहीं मिल पा रही है. बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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विद्यालय परिसर में शौचालय के पास बना सेप्टिक टैंक बिना ढक्कन के खुला पड़ा है, जो छात्रों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है. खुले गड्ढे के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है. स्कूल में रोजाना सैकड़ों छात्र-छात्राओं की आवाजाही के बीच इस तरह की लापरवाही विद्यालय की बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है.
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शौचालय का खुला टंकी बना जानलेवा (फोटो-संजय अभय)

विद्यालय परिसर में शौचालय के पास बना सेप्टिक टैंक बिना ढक्कन के खुला पड़ा है, जो छात्रों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है. खुले गड्ढे के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है. स्कूल में रोजाना सैकड़ों छात्र-छात्राओं की आवाजाही के बीच इस तरह की लापरवाही विद्यालय की बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है.

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जीए हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज की कक्षा 9 ए में नामांकित 100 विद्यार्थियों में से केवल 58 छात्र-छात्राएं ही उपस्थित मिले. विद्यालय की बदहाल स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का असर छात्रों की नियमित उपस्थिति पर भी दिखाई दे रहा है. कभी क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में गिने जाने वाले इस स्कूल में घटती उपस्थिति शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
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100 नामांकित, लेकिन 58 ही पहुंचे कक्षा में (फोटो-संजय अभय)

जीए हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज की कक्षा 9 ए में नामांकित 100 विद्यार्थियों में से केवल 58 छात्र-छात्राएं ही उपस्थित मिले. विद्यालय की बदहाल स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का असर छात्रों की नियमित उपस्थिति पर भी दिखाई दे रहा है. कभी क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में गिने जाने वाले इस स्कूल में घटती उपस्थिति शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

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जीए हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज परिसर में स्थित यह विशाल और वर्षों पुराना पेड़ विद्यालय की पहचान बन चुका है. स्कूल की स्थापना के समय से मौजूद यह पेड़ आज भी सैकड़ों छात्र-छात्राओं को छांव और सुकून देता है.
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विद्यालय की पहचान बना दशकों पुराना पेड़ (फोटो-संजय अभय)

जीए हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज परिसर में स्थित यह विशाल और वर्षों पुराना पेड़ विद्यालय की पहचान बन चुका है. स्कूल की स्थापना के समय से मौजूद यह पेड़ आज भी सैकड़ों छात्र-छात्राओं को छांव और सुकून देता है.

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साक्षी कुमारी

लेखक के बारे में

By साक्षी कुमारी

साक्षी कुमारी को डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 वर्षों का अनुभव है. पिछले तीन वर्षों से वह डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव है. बिहार की राजनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनकी विशेष रुचि है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी अच्छी समझ है, जिससे वह पाठकों तक समय पर और प्रभावी ढंग से खबरें पहुंचाने में दक्ष हैं. तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यशैली है.

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