गोपालगंज में लंपी वायरस की दस्तक, कई गांवों में मवेशी बीमार, पशुपालकों की बढ़ी चिंता
लंपी बीमारी (सांकेतिक तस्वीर)
Gopalganj Lumpy Virus : गोपालगंज के बैकुंठपुर प्रखंड में मवेशियों में लंपी त्वचा रोग के मामले सामने आने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. विभाग ने भ्रमणशील एंबुलेंस टीम को सक्रिय कर दिया है. जानिए इस वायरस के लक्षण और बचाव के तरीके.
Gopalganj Lumpy Virus : गोपालगंज के बैकुंठपुर प्रखंड में मवेशियों में लंपी त्वचा रोग के मामले सामने आने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. सिरसा मानपुर, चमनपुरा, हरदिया, खैरा आजम, बनकट्टी और दिघवा दक्षिण समेत कई गांवों में मवेशियों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है. संक्रमण को देखते हुए पशुपालन विभाग ने भ्रमणशील एंबुलेंस टीम को सक्रिय कर दिया है और गांवों में पहुंचकर बीमार पशुओं का इलाज किया जा रहा है.
तीन साल बाद फिर बीमारी की दस्तक
बैकुंठपुर प्रखंड में मवेशियों के बीच लंपी त्वचा रोग ने एक बार फिर दस्तक दी है. करीब तीन वर्ष पहले भी इस बीमारी का प्रकोप सामने आया था, जिसमें बड़ी संख्या में गाय और भैंस प्रभावित हुए थे. अब दोबारा बीमारी के मामले सामने आने से पशुपालक सतर्क हो गए हैं.
इन गांवों में ज्यादा मामले सामने आने की जानकारी
वर्तमान में सिरसा मानपुर, चमनपुरा, हरदिया, खैरा आजम, बनकट्टी और दिघवा दक्षिण समेत अन्य गांवों में लंपी त्वचा रोग से प्रभावित मवेशियों की जानकारी सामने आई है. बीमारी के बढ़ते मामलों को लेकर ग्रामीणों में चिंता का माहौल है.
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पशुपालन विभाग ने सक्रिय की भ्रमणशील एंबुलेंस टीम
संक्रमण की जानकारी मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने भ्रमणशील एंबुलेंस टीम को सक्रिय कर दिया है. टीम गांवों में पहुंचकर बीमार मवेशियों की जांच कर रही है और जरूरत के अनुसार दवाएं उपलब्ध करा रही है.
सिरसा मानपुर में डॉक्टर ने किया बीमार पशुओं का इलाज
सिरसा मानपुर गांव में रोगग्रस्त मवेशियों के इलाज के लिए चिकित्सक डॉ. अमीत कुमार श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ पहुंचे. उन्होंने बीमार पशुओं की जांच की और आवश्यक दवाएं दीं. इस दौरान पशुपालकों को बीमारी से बचाव और मवेशियों की देखभाल के तरीके भी बताए गए.
मच्छर, मक्खी और किलनी से फैलता है रोग
डॉ. अमीत कुमार श्रीवास्तव के अनुसार लंपी त्वचा रोग विषाणुजनित बीमारी है. यह मच्छर, मक्खी और किलनी के काटने से फैल सकती है. उन्होंने पशुपालकों को बीमारी के लक्षण दिखने पर मवेशियों की नियमित चिकित्सकीय देखभाल कराने की सलाह दी.
छह से सात दिन तक विशेष देखभाल की सलाह
चिकित्सक के अनुसार बीमारी से प्रभावित मवेशियों को लगातार छह से सात दिनों तक चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत होती है. इस दौरान एंटीसेप्टिक दवाओं के इस्तेमाल और मक्खी-मच्छर से बचाव पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है.
संक्रमित मवेशियों को स्वस्थ पशुओं से रखें अलग
पशुपालकों को संक्रमित मवेशियों को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह दी गई है. विभाग की ओर से संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए साफ-सफाई और पशुओं की निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है.
पहले कराया जा चुका है टीकाकरण
पशुपालन विभाग का कहना है कि क्षेत्र में मवेशियों का पहले से टीकाकरण कराया गया था. इसके बावजूद बीमारी के मामले सामने आए हैं. विभाग की टीम अब संक्रमण को नियंत्रित करने और प्रभावित पशुओं के उपचार पर विशेष ध्यान दे रही है.
इलाज के लिए टीम लगातार कर रही काम
बीमार मवेशियों के उपचार में संजय पांडेय, बसंत कुमार तिवारी, अमरजीत राम और अमरेंद्र कुमार भी जुटे हुए हैं. विभाग की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर पशुपालकों को बीमारी से बचाव के उपायों की जानकारी दे रही है.
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