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Gopalganj News : थावे महोत्सव में मां सिंहासनी के दरबार में बही स्वर की सरिता, गोता लगाते रहे श्राेता

Gopalganj News : यूपी और बिहार का सीमावर्ती जिला बिहार का गोपालगंज मां सिंहासनी की धरा है. यहां मां भगवती थावे मंदिर में साक्षात विराजमान हैं. मंदिर परिसर की यही खासियत है कि वहां दाखिल होते ही हर कोई अपना वैभव भूल जाता है. मां दरबार में पहुंचते ही कलाकार भी अपनी सारी कीर्ति को मां को समर्पित कर देते हैं.

गोपालगंज. यूपी और बिहार का सीमावर्ती जिला बिहार का गोपालगंज मां सिंहासनी की धरा है. यहां मां भगवती थावे मंदिर में साक्षात विराजमान हैं. मंदिर परिसर की यही खासियत है कि वहां दाखिल होते ही हर कोई अपना वैभव भूल जाता है.

मंत्रमुग्ध रहे श्रोता

मां के दरबार में पहुंचते ही कलाकार भी अपनी सारी कीर्ति को मां को समर्पित कर देते हैं. थावे महोत्सव की दूसरी निशा में मंगलवार को गायन-वादन की स्वर लहरियों ने ऐसा जादू बिखेरा कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गये, कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से मां के दरबार में हाजिरी लगायी. स्तरीय कलाकार संजय उपाध्याय एवं उनकी टीम के द्वारा नाटक विदेशिया का मंचन किया. भिखारी ठाकुर की विरासत की जीवंत प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरीं. दूसरी प्रस्तुति में राज्यस्तरीय कलाकार सुदीपा घोष एवं टीम द्वारा सुरों की सरिता बहायी तो सुधि श्रोता उसमें गोता लगाने से अपने आप को रोक नहीं पाये. समूह नृत्य श्रोताओं को बांधे रखा. हर कोशिश मां सिंहासनी को समर्पित रही. कॉमेडियन राज सोनी ने अपने हास्य-व्यंग्य से हंसी के जो गुलगुले छोड़े, तो सभी लोट-पोट होकर रह गये. राज्यस्तरीय सामयिक परिवेश संस्था पटना के कलाकारों द्वारा नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुति को भी लोगों ने खूब सराहा. यह प्रस्तुति कार्यक्रम और ऊंचाई दे गयी.

माेनाली ठाकुर ने महोत्सव में लगाये चार चांद

अंत में प्रसिद्ध बॉलीवुड सिंगर मोनाली ठाकुर की प्रस्तुति ने थावे महोत्सव में चार चांद लगा दिया. मोनाली ठाकुर ने भरतीय संगीत की जो सरिता बहायी कि लोग गोता लगाने लगे. एक से बढ़ कर एक प्रस्तुति ने इतिहास रच दिया. अपनी सुमधुर आवाज की जलवा बिखेर कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. आपने गायन की शुरुआत से कर कुछ फिल्मी गानों से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया. आपके साथ साथी कलाकारों ने अच्छी सहभागिता निभाकर प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया. सुर लहरियों ने अपनी प्रस्तुति से महोत्सव को भव्य बनाने में कोई कोर- कसर नहीं छोड़ी. दर्शक भी तालियों से कलाकारों के हौसले को बढ़ाते नजर आये.

अपनी समृद्ध लोक परंपरा पर इतरा उठे दर्शक

पहली निशा में सोमवार को आधी रात तक कल्पना पटवारी की प्रस्तुति ने विलुप्त हो रही परंपरा को सहेजने का काम किया. भोजपुरी मिट्टी की महक को अपने प्रस्तुति में बिखेरा तो दर्शक बाब-बाग हो उठे. समृद्ध लोक परंपरा पर इतरा उठे. पचरा से दादरा, पूर्वी, ठुमरी भोजपुरी की समृद्ध संस्कृति को महोत्सव में मां सिंहासनी को समर्पित किया. कल्पना के कार्यक्रम का दर्शकों ने भी भरपूर आनंद उठाया. कल्पना ने भी लोगों को अपनी कला से सराबोर करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. प्रशासन की ओर से समय की ओर ध्यान दिलाकर कार्यक्रम का समापन कराया गया.

कलाकारों को सहज भाव से सुना श्रोताओं ने

आप माने या ना मानें. देश के दिग्गज फनकार. जिन्हें सुनना और मिलना आमतौर पर कठिन होता है, उनको सहज भाव से देख लेना और भक्तिपूर्ण माहौल में उनकी कला का आनंद लेना. यह सब मां सिंहासनी के दरबार में ही देखने को मिल सकता है. वर्ष 2012 से पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन प्रति वर्ष होता रहा है. थावे महोत्सव ही अपने-आप में ऐसा है, जिसका हिस्सा होना अपने आपमें प्रतिष्ठा का सूचक माना जाता है.

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