गोपालगंज में चकिया हाईस्कूल को मिली इंटर की पढ़ाई की स्वीकृति, ग्रामीण छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत
Published by : Vivek Pandey Updated At : 12 Jun 2026 6:58 AM
Gopalganj News: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने चकिया हाईस्कूल, गोपालगंज को सत्र 2026-28 से इंटरमीडिएट (साइंस व आर्ट्स) की पढ़ाई शुरू करने की स्वीकृति दी. 240 सीटों पर नामांकन होगा, जिससे ग्रामीण छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी.
(गोपालगंज से अजीत कुमार द्विवेदी की रिपोर्ट)
Gopalganj News: गोपालगंज जिले के पंचदेवरी प्रखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र स्थित स्व रामनंदन लाल उच्च विद्यालय चकिया के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने विद्यालय को सत्र 2026-28 से उच्च माध्यमिक स्तर की पढ़ाई संचालित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है. अब इस विद्यालय में साइंस और आर्ट्स दोनों संकायों में नामांकन शुरू होगा.
स्पॉट नामांकन के निर्देश जारी 240 सीटों पर होगा दाखिला
विद्यालय में इंटर की पढ़ाई शुरू होने के साथ ही स्पॉट नामांकन की प्रक्रिया लागू की जाएगी.
- साइंस संकाय में 120 सीटें
- आर्ट्स संकाय में 120 सीटें
कुल मिलाकर 240 विद्यार्थियों को प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में नामांकन का अवसर मिलेगा इससे ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को उच्च शिक्षा का बेहतर अवसर मिलेगा.
ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को मिलेगी बड़ी सहूलियत
अब तक इस क्षेत्र के विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं को इंटर की पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता था जिससे काफी कठिनाई होती थी.
- इंटर की पढ़ाई शुरू होने से
- ग्रामीण छात्रों को नजदीक ही शिक्षा मिलेगी
- छात्राओं की पढ़ाई जारी रखने में आसानी होगी
- ड्रॉपआउट की समस्या में कमी आएगी
स्थानीय लोगों में इस निर्णय को लेकर खुशी का माहौल है.
जांच रिपोर्ट के बाद मिली स्वीकृति
विद्यालय के प्रधानाध्यापक रत्नेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा उच्च माध्यमिक शिक्षा की स्वीकृति के लिए आवेदन किया गया था.
इसके बाद जिला स्तर पर गठित टीम ने विद्यालय की जांच की जिसमें आधारभूत संरचना शैक्षणिक व्यवस्था प्रयोगशाला लाइब्रेरी और उपलब्ध संसाधनों का मूल्यांकन किया गया.
जांच रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को भेजी गई जिसके बाद समिति ने स्वीकृति प्रदान कर दी.
वित्तरहित होते हुए भी उत्कृष्ट व्यवस्था का उदाहरण
चकिया हाईस्कूल एक वित्तरहित विद्यालय है इसके बावजूद इसकी व्यवस्थाएं अन्य कई उच्च विद्यालयों के लिए उदाहरण बनी हुई हैं.
- विद्यालय में
- आधुनिक लैब
- समृद्ध लाइब्रेरी
- स्मार्ट क्लास सुविधा
- सुसज्जित कक्षाएं
- बेहतर कैंपस व्यवस्था
इन्हीं सुविधाओं को देखते हुए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने इंटर की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति दी है
1980 में हुई थी विद्यालय की स्थापना
यह विद्यालय 23 अक्टूबर 1980 को स्वतंत्रता सेनानी स्व रामनंदन लाल की स्मृति में उनके पुत्र समाजसेवी स्व मदन मोहन प्रसाद श्रीवास्तव द्वारा स्थापित किया गया था.
स्थापना के समय से ही यह विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की ज्योति जलाता आ रहा है.
विद्यालय परिवार और ग्रामीणों में खुशी का माहौल
इंटर की स्वीकृति मिलने के बाद विद्यालय परिवार अभिभावकों और क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है लोगों का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों की शिक्षा को नया आधार मिलेगा.
बोले प्रधानाध्यापक
प्रधानाध्यापक रत्नेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि संस्थापक ने जिस उद्देश्य से इस विद्यालय की स्थापना की थी वह अब पूरा होते हुए नजर आ रहा है. विद्यालय की पूरी टीम इस उपलब्धि से बेहद खुश है और आगे बेहतर शिक्षा देने के लिए पूरी तरह समर्पित है.
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By Vivek Pandey
विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.
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