गांधी महाविद्यालय में नियुक्ति धांधली पर शिक्षा विभाग का एक्शन : दो दिनों में तलब किए गए रिकॉर्ड

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 30 May 2026 2:12 PM

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गांधी महाविद्यालय का फोटो.

Gopalganj news : विभाग ने प्रभारी प्राचार्य को कड़ी चेतावनी देते हुए तय समय सीमा के भीतर अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

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Gopalganj news : (विकास दुबेक की रिपोर्ट) शहर के गांधी महाविद्यालय में शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर हुई धांधली का मामला अब तूल पकड़ चुका है. नियमों को ताक पर रखकर की गई इन नियुक्तियों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. डीपीओ (माध्यमिक शिक्षा) प्रवीन कुमार प्रभात ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य से नियुक्ति से संबंधित सभी रिकॉर्ड और साक्ष्य दो दिनों के भीतर तलब किए हैं.

स्वेच्छाचारिता और वित्तीय अनियमितता का आरोप

डीपीओ माध्यमिक प्रवीन कुमार प्रभात ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कॉलेज में नियम-कानूनों का पालन किए बिना पूरी तरह से मनमानी की गई है. शिक्षा विभाग के अनुसार, यह कृत्य सीधे तौर पर मनमानेपन, स्वेच्छाचारिता, विभागीय निर्देशों की अवहेलना, गबन और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को दर्शाता है. यह पूरी प्रक्रिया महाविद्यालय के सुचारू संचालन में बाधा उत्पन्न करने की श्रेणी में आती है. विभाग ने प्रभारी प्राचार्य को कड़ी चेतावनी देते हुए तय समय सीमा के भीतर अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

पूर्व प्राचार्य की शिकायत पर शुरू हुई जांच

इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते 19 मई को हुई, जब महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य अशोक कुमार सिंह एवं प्रदीप कुमार सिंह (गांधी इंटर कॉलेज) ने शिक्षा विभाग को लिखित रूप से एक शिकायती आवेदन सौंपा था. लिखित आरोप में कहा गया है कि महाविद्यालय की प्रबंध समिति (मैनेजिंग कमेटी) का गठन करने का वैधानिक अधिकार केवल बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पटना को है. प्रबंध समिति के अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद इस समिति को अद्यतन (अपडेट) करने की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं की गई.

बिना प्रबंध समिति के प्रभारी प्राचार्य ने कर दी अवैध बहाली

शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि नियमानुसार महाविद्यालय में शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों की नियुक्ति करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ प्रबंध समिति के पास सुरक्षित होता है, न कि प्रभारी प्राचार्य को इसका कोई अधिकार है. इसके अतिरिक्त प्रतिवेदन में यह भी उठाया गया है कि विगत कई वर्षों का सरकारी अनुदान अभी बकाया है. ऐसी स्थिति में प्रभारी प्राचार्य द्वारा नियमों की धज्जी उड़ाते हुए अवैध तरीके से नियुक्तियां कर ली गईं.

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