बकास्त भूमि को लेकर गोपालगंज में बढ़ा विवाद, आदेश पर रोक की मांग

Published by : GOVIND KUMAR Updated At : 21 Dec 2025 6:59 PM

विज्ञापन

गोपालगंज. जिले में बकास्त भूमि को सरकारी भूमि घोषित कर उसे लैंड बैंक में शामिल किये जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है.

विज्ञापन

गोपालगंज. जिले में बकास्त भूमि को सरकारी भूमि घोषित कर उसे लैंड बैंक में शामिल किये जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. इस संबंध में बिहार विधान परिषद राजीव कुमार उर्फ गप्पू बाबू ने उप मुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार को एक आवेदन देकर जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गयी है. आवेदन में कहा गया है कि बकास्त भूमि बिहार के राजस्व अभिलेख, खतियान एवं पंजी-टू में रैयती भूमि के रूप में दर्ज है, जिस पर वर्षों से हजारों लोगों का घर, सहन और खेती-बाड़ी निर्भर है. आवेदन के अनुसार वर्ष 1919 के खतियान में बकास्त भूमि के बकब्जे कॉलम में रैयतों के नाम दर्ज हैं. जमींदारी उन्मूलन के बाद 1953 में ऐसे रैयतों के नाम से जमाबंदी कायम की गयी और आज तक वे नियमित रूप से लगान अदा कर रहे हैं. माननीय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि जिस भूमि की लगान सरकार स्वीकार करती है, वह रैयती मानी जाती है. इसके बावजूद गोपालगंज जिला प्रशासन द्वारा बकास्त भूमि की जमाबंदी रद्द करने और उसे सरकारी घोषित करने की कार्रवाई से आम रैयतों में भय और आक्रोश है. आवेदन में मांग की गयी है कि जब तक राजस्व विभाग की ओर से स्पष्ट क्लेरिफिकेशन जारी न हो, तब तक जिला स्तर की कार्रवाई पर रोक लगायी जाये, ताकि सुशासन की गरिमा बनी रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
GOVIND KUMAR

लेखक के बारे में

By GOVIND KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन