गोपालगंज में अगवा छात्रा का तेजाब से जला शव बरामद, पुलिस पर लगा संगीन इल्जाम

Author Ashish jha
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सांकेतिक

Bihar News:परिजनों का कहना है कि पैसे नहीं देने पर पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई. रविवार की सुबह भी सूचना के बावजूद काफी देर से पुलिस पहुंची. यदि समय से और कड़ाई से गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ कर कार्रवाई की गई रहती तो अपहृत छात्रा की जान बच सकती थी.

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Bihar News: गोपालगंज. बिहार के गोपालगंज जिले में दो दिन पूर्व स्थानीय थाने के हुस्सेपुर जानकीनगर गांव से एक शादी समारोह से अपहृत नौवीं की छात्रा का शव लखरांव पोखरा के समीप से बरामद किया गया. रविवार की सुबह शिव मंदिर में पूजा करने गए लोगों ने शव को देखा. इसकी सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने शव को बरामद किया. छात्रा के सामने के दांत टूटे हुए थे. चेहरे पर तेजाब जैसा पदार्थ डालने के निशान हैं. मौके पर पहुंचे एसडीपीओ आनंद मोहन गुप्ता ने बताया कि मामले में गिरफ्तार एक आरोपी से पूछताछ की जा रही है.

गुस्साये लोग सड़क पर उतरे

घटना की सूचना मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई. आक्रोशित ग्रामीणों ने भोरे-मीरगंज मुख्य पथ को शिव मंदिर के समीप जाम भी कर दिया, जिससे कुछ देर के लिए मार्ग पर आवागमन बाधित हो गया. ग्रामीण हिरासत में लिए गए एक आरोपी को उनके हवाले करने की मांग पर अड़े हुए थे. उनका कहना था कि जब तक आरोपित हवाले नहीं किया जाता, तब तक शव को पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजा जाएगा. मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ आनंद मोहन गुप्ता मौके पर पहुंचे और समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित किया. इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए गोपालगंज भेजा जा सका.

परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. परिजनों के आरोप से संबंधित वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. परिजनों ने आरोपियों से मिलीभगत, लापरवाही, ढूंढने के लिए पैसे मांगने तथा कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि अपहरण के संबंध में आवेदन देने के समय पैसे लिए गए. फिर से ढूंढने के लिए भी पैसे की मांग की गई और पैसे नहीं देने पर पूरे मामले की जानकारी होने तथा एक आरोपित के हिरासत में रहने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई. रविवार की सुबह भी सूचना के बावजूद काफी देर से पुलिस पहुंची. यदि समय से और कड़ाई से गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ कर कार्रवाई की गई रहती तो अपहृत छात्रा की जान बच सकती थी. हालांकि थानाध्यक्ष ने परिजनों के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है.

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आशीष झा

लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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