शिशुआंे को जीवनदान दे रहा है एसएनसीयू

Published at :23 May 2017 3:35 AM (IST)
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शिशुआंे को जीवनदान दे रहा है एसएनसीयू

राहत. सदर अस्पताल में अब नवजात शिशुओं का इलाज हुआ आसान सदर अस्पताल में नवजात बच्चों की बेहतर देखभाल एवं उनका समुचित इलाज के मकसद से अस्पताल परिसर में एसएनसीयू ने काम कराना शुरू कर दिया है. नवजात बच्चों की विशेष देखभाल में यूनिट कारगर साबित हो रहा है. गोपालगंज : सदर अस्पताल में शिशुओं […]

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राहत. सदर अस्पताल में अब नवजात शिशुओं का इलाज हुआ आसान

सदर अस्पताल में नवजात बच्चों की बेहतर देखभाल एवं उनका समुचित इलाज के मकसद से अस्पताल परिसर में एसएनसीयू ने काम कराना शुरू कर दिया है. नवजात बच्चों की विशेष देखभाल में यूनिट कारगर साबित हो रहा है.
गोपालगंज : सदर अस्पताल में शिशुओं के इलाज के लिए बनाया गया एसएनसीयू वरदान साबित हो रहा है. शून्य से 28 दिनों के नवजात शिशुओं का संपूर्ण इलाज कर उनको जीवनदान दे रहा है. एक माह में कुल 796 शिशुओं को स्वस्थ करने का गौरव हासिल कर चुका है. ये वैसे शिशु हैं, जो जन्म के बाद घातक बीमारी से जूझ रहे थे. इनके इलाज में थोड़ा विलंब जान ले सकता था. इनको चंगा कर यूनिट से बाहर किया गया.
एसएनसीयू (सिक एंड न्यू बाॅर्न केयर यूनिट) पर एक करोड़ रुपये खर्च आये हैं. पहले चरण में 15 शिशुओं का एक साथ इलाज करने की सुविधा है. आइसीयू, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन आदि की अत्याधुनिक सुविधा है. यहां 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टर और नर्स तैनात रहते हैं. एसएनसीयू में डॉ आरके आर्या, डॉ रविश रंजन, डॉ विजय कुमार, डॉ कृष्णा सिन्हा की तैनाती है, तो यूनिट इंचार्ज रागिनी विलियम को बनाया गया है. यहां भरती होनेवाले शिशुओं को नि:शुल्क दवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं.
गंभीर स्थिति में शिशुओं का इलाज : एसएनसीयू में जन्म लेने के साथ ही श्वांस, जांडिस, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म, अविकसित शिशुओं का गंभीर स्थिति में इलाज किया जा रहा है. सदर अस्पताल में नवजात शिशुओं का इलाज शुरू होने से जन्म-मृत्यु दर में भी कमी आयी है. अब नवजात शिशुओं के इलाज की टेंशन खत्म हो गयी है.
प्रसव के लिए प्राइवेट नर्सिंग होम से बेहतर सुविधा सदर अस्पताल में मिलने लगी है. वह भी बिल्कुल फ्री. सदर अस्पताल में संचालित एसएनसीयू सेवा का लाभ सिर्फ अस्पताल में जन्म लेनेवाले नवजातों को ही नहीं मिल रहा है.
अपितु सभी सरकारी व निजी शिशु रोग विशेषज्ञों द्वारा भी गंभीर बीमारी से जूझ रहे नवजातों को यहां रेफर किया जाता है.
विशेषज्ञ डॉक्टर देखभाल के लिए तैनात
स्वीपर और गार्ड की जरूरत : एसएनसीयू पूरी तरह से वातानुकूलित है. इसमें धूल-मिट्टी का कण नहीं जाये, इस पर खास ख्याल रखा जा रहा है. नवजात को भरती कराने के बाद उनके अभिभावकों को बाहर रखा जा रहा है. इसकी व्यवस्था दुरुस्त रहे इसके लिए सिविल सर्जन के स्तर पर लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है. सोमवार को सिविल सर्जन डॉ मधेश्वर प्रसाद शर्मा यूनिट में अचानक पहुंचे, जहां उन्होंने डॉक्टर और नर्स से जानकारी ली. उनके साथ डीपीएम अरविंद कुमार झा, अस्पताल प्रबंधक अमरेंद्र कुमार, अजय कुमार भी थे. डॉ रबिश कुमार ने सिविल सर्जन को शिशुओं की स्थिति की जानकारी दी. डिस्ट्रिक रिसोर्स यूनिट के डॉ गितिका ने सिविल सर्जन से कहा कि यहां एक गार्ड और दो स्वीपर रूरी है. इनसे बेहतर सुविधा बनी रहेगी. सीएस ने उसे पूरा कराने का भरोसा भी दिलाया.
बदलते तापमान से बीमार होते हैं नवजात
जन्म से 42 दिनों के भीतर बच्चों को सबसे अधिक बीमारी तापमान बदलाव से होती है. ऐसी स्थिति में एसएनसीयू वार्ड का वातानुकूलित माहौल नवजात के स्वास्थ्य के लिए प्रभावी होता है. निश्चित तापमान में रख कर बच्चों का इलाज करने से वह जल्दी ठीक हो जाते हैं.
डाॅ आरके आर्या, इंचार्ज एसएनसीयू
सपना था एसएनसीयू बनवाना : सीएस
सदर अस्पताल में एसएनसीयू बनवाना मेरा सपना था. यहां शिशुओं के स्वस्थ होते देख काफी संतुष्टि मिल रही है. एसएनसीयू को और बड़ा और बेहतर बनाने का काम चल रहा है. जून तक इसे और अत्याधुनिक बना कर जिले को सौंपेंगे.
डॉ मधेश्वर शर्मा, सिविल सर्जन, गोपालगंज
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