देश को नीतीश की जरूरत : बाबूलाल मरांडी

Published at :17 Oct 2016 12:00 AM (IST)
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देश को नीतीश की जरूरत : बाबूलाल मरांडी

जदयू के खुले अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में आये झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आज देश को नीतीश कुमार जैसे नेतृत्व की जरूरत है. देश में जहां कहीं भी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकल्प की चर्चा होती है, नीतीश कुमार का नाम पहले आता है. नीतीश कुमार […]

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जदयू के खुले अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में आये झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आज देश को नीतीश कुमार जैसे नेतृत्व की जरूरत है. देश में जहां कहीं भी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकल्प की चर्चा होती है, नीतीश कुमार का नाम पहले आता है. नीतीश कुमार के जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि आज देश जिस दौर से गुजर रहा है, राजनीति में विचार का अभाव है. सत्ता को प्राप्त करना अधिकार जैसा बन गया है. इससे नेताओं के प्रति विश्वास में कमी आयी है. ऐसे समय में नीतीश कुमार के नेतृत्व में लोगों की आस जगी है. संपूर्ण देश की जनता विकल्प को ढूंढ़ रही है.

कौन नेता हमारा नेतृत्व करेगा, यह सवाल है. उन्होंने बिहार जदयू से अपील की कि बिहार के लिए नीतीश कुमार ने बहुत कुछ किया है, अब देश को उनकी जरूरत है. पिछले लोकसभा चुनाव की चर्चा करते हुए मरांडी ने कहा कि केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी और उसके नेता ने देश को सपने दिखाये और आज पूरी तरह से उन सपनों को उड़ा दिया. अब उसे जुमला करार देते हैं. दूसरी ओर लोग पूछ रहे हैं कि अब क्या होगा? अब कहां गये अच्छे दिन? किसान, मजदूर, नौजवान, आदिवासी, अल्पसंख्यक और पिछड़ा, हर कोई परेशान तबाह है. भाजपा पहले नैतिकता की बात करती थी.

उन्होंने कहा कि झारखंड में जब से सरकार बनी संविधान की धज्जियां उड़ रही हैं. देश में मजबूत विकल्प और विश्वसनीय नेतृत्व की जरूरत है. जदयू के पास नेता भी हैं और अनुभव भी. हम सब की जिम्मेवारी बनती है कि मजबूत विकल्प पेश करें और अच्छी सरकार बना सके. जब से नीतीश कुमार ने झारखंड का दौरा किया है, सबसे अधिक भाजपा के लोग परेशान होते हैं. संकट, विचार और विश्वसनीयता की दृष्टिकोण में इस रिक्तता को कोई भर सकता है तो वह नीतीश कुमार हैं.

नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा कि जब से वह पीएम बने हैं, तीन बार भूमि अध्यादेश कानून में संशोधन लाने की कोशिश की है. झारखंड में किसानों की जमीन जबरदस्ती छीनी जा रही है. विरोध करने पर लाठी और गोली चल रही है. आधा दर्जन लोग मारे गये हैं और सैकड़ों लोग घायल हो चुके हैं. भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही है. काॅरपोरेट घरानों को लाभ देने के लिए हर दिन कानून को नये सिरे से परिभाषित करते हैं.

उन्होंने कहा कि 60 महीने का समय प्रधानमंत्री ने मांगा था. आधा समय बीत गया है. उनके पास जनता के बीच जाने के लिए कोई भी मुद्दा नहीं है. किसानों को धोखा हुआ है. नौजवान निराश है और इसलिए उन्माद पैदा किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में अब अल्पसंख्यक वर्ग को गाय पालना भी मुश्किल हो गया है.

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