17 वर्षों में खर्च हो गये तीन सौ करोड़

गोपालगंज : 90 के दशक के पूर्व गंडक नदी जिले के लिए वरदान थी. 90 के दशक के अंत में गंडक का रुख बदला और जिले में शुरू हुआ तबाही का दौर. 1999 से लेकर आज तक ऐसा कोई वर्ष नहीं रहा जब गंडक ने तबाही न मचायी हो. पांच बार सारण तटबंध टूटा, चार […]
गोपालगंज : 90 के दशक के पूर्व गंडक नदी जिले के लिए वरदान थी. 90 के दशक के अंत में गंडक का रुख बदला और जिले में शुरू हुआ तबाही का दौर. 1999 से लेकर आज तक ऐसा कोई वर्ष नहीं रहा जब गंडक ने तबाही न मचायी हो. पांच बार सारण तटबंध टूटा, चार बार छरकियां टूटीं, प्रतिवर्ष बाढ़ का दौर जारी रहा.
उत्तर प्रदेश की सीमा से लेकर प्यारेपुर तक 70 किमी में गंडक की तूफानी धारा जिले की 20 फीसदी आबादी को तबाह करती रही. तबाही का यह दौर अनवरत बढ़ता चला गया. इस बार भी जिले में बाढ़ की तबाही मची हुई है. इन 17 वर्षों में कभी तटबंध मरम्मत के नाम पर तो कभी फाइटिंग वर्क तो कभी राहत के नाम पर तीन सौ करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये. ढाई सौ करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ, 85 हजार आबादी विस्थापित हो गयी, 26 हजार घर गिरे, आधा दर्जन गांव बेचिरागी हो गये.
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