कार्रवाई. 7.33 करोड़ के चावल घोटाले में राइस मिलों पर कसा शिकंजा

Published at :29 Mar 2016 3:37 AM (IST)
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कार्रवाई.  7.33 करोड़ के चावल घोटाले में राइस मिलों पर कसा शिकंजा

राइस मिलरों पर वारंट धान की मिलिंग करने के नाम पर जिले के सात मिलरों ने मिल कर 9.60 करोड़ रुपये के चावल का घोटाला किया. वर्ष 2011-12, 2012-13 तथा 2013-14 में यह घोटाला हुआ है. घोटाला उजागर होने के बाद राज्य खाद्य निगम ने नीलाम पत्रवाद दायर किया तथा इनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी, […]

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राइस मिलरों पर वारंट

धान की मिलिंग करने के नाम पर जिले के सात मिलरों ने मिल कर 9.60 करोड़ रुपये के चावल का घोटाला किया. वर्ष 2011-12, 2012-13 तथा 2013-14 में यह घोटाला हुआ है. घोटाला उजागर होने के बाद राज्य खाद्य निगम ने नीलाम पत्रवाद दायर किया तथा इनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी, जिसमें दो मिलरों ने राशि को जमा कर दिया था. शेष राशि के लिए विभाग कार्रवाई में जुटा है.
गोपालगंज : चावल घोटाले में शामिल मिलरों पर कानून का शिकंजा कसने लगा है. राज्य खाद्य निगम की तरफ से दाखिल किये गये नीलाम पत्रवाद में राइस मिलरों पर वारंट जारी किया गया है. जारी वारंट के बाद भी मिलर राशि जमा नहीं करते हैं, तो उनकी संपत्ति को नीलाम कर राशि की रिकवरी की जायेगी. नीलाम पत्र दाखिल होने के बाद संकट मोचन राइस मिल, फुलवरिया तथा मां काली राइस मिल फुलुगनी ने पटना हाइकोर्ट में अपील की है,
जहां फिलहाल मामला सुनवाई में है. बाकी राइस मिलरों पर कार्रवाई जारी है. इस घोटाले में शामिल मिलरों की सेटिंग की बदौलत उन्हें दूसरे वर्ष भी काम करने के लिए एग्रीमेंट राज्य खाद्य निगम की तरफ से कर लिया गया था. विभागीय सूत्रों ने बताया कि संकट मोचन राइस मिल,
फुलवरिया तथा मां काली राइस मिल, फुलुगनी थावे के द्वारा वर्ष 2012-13 में क्रमश: 991076 तथा 3877349 रुपये का चावल नहीं देने के बाद भी दोनों मिलरों को 2013-14 में भी काम करने का मौका दिया गया. इसमें संकट मोचन राइस मिल ने 5394232, मां काली राइस मिल ने 8018747 के चावल का घोटाला कर लिया. एग्रीमेंट करनेवाले अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
घोटाले में लिप्त पांच अधिकारियों पर प्रपत्र ‘क’ गठित : धान खरीद में अधिकारी भी घोटाले में पीछे नहीं रहे. धान और गेहूं की खरीद में 1.51 करोड़ का घोटाला अधिकारियों और कर्मियों ने मिल कर किया. जब जांच में मामला सामने आया, तो कई अधिकारियों ने अपनी राशि जमा कर दी, जबकि पांच अधिकारियों ने 1.38 करोड़ की राशि जमा नहीं की, जिसके कारण उनके विरुद्ध न सिर्फ प्राथमिकी दर्ज की गयी, बल्कि एक अधिकारी को जेल भेजा जा चुका है. पांच आरोपितों के खिलाफ विभागीय प्रपत्र क गठित कर कार्रवाई शुरू की गयी है.
तेजी से होगी विभागीय कार्रवाई
राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक जयशंकर प्रसाद ने बताया कि चावल घोटाले के मामले में विभाग तेजी से कार्रवाई में लगा है. किसी भी स्थिति में घोटाले में शामिल लोगों को बक्सा नहीं जा सकता है.
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