झुलसा रोग से आलू पर खतरा

Updated at :17 Jan 2016 6:31 PM
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झुलसा रोग से आलू पर खतरा

झुलसा रोग से आलू पर खतरा बेरहम मौसम की मार -कृषि वैज्ञानिक किसानों को दे रहे दवाओं के छिड़काव की सलाह -न्यूनतम व अधिकतम तापमान में अधिक अंतर से मंडरा रहा खतरा -मौसम बदला और पड़ा कुहरा तो फसल की बरबादी निश्चित फोटो नं-4, आलू के खेत में दिख रहा ठंड का असर संवाददाता, गोपालगंजआलू […]

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झुलसा रोग से आलू पर खतरा बेरहम मौसम की मार -कृषि वैज्ञानिक किसानों को दे रहे दवाओं के छिड़काव की सलाह -न्यूनतम व अधिकतम तापमान में अधिक अंतर से मंडरा रहा खतरा -मौसम बदला और पड़ा कुहरा तो फसल की बरबादी निश्चित फोटो नं-4, आलू के खेत में दिख रहा ठंड का असर संवाददाता, गोपालगंजआलू की फसल पर झुलसा रोग का खतरा मंडरा रहा है. यह फफूंदी लगने से हो रहा है. जब बहुत अधिक ठंडक व कुहरा कई दिनों तक पड़ने लगे, तो फफूंदी लग जाती है. इससे बैक्टीरिया लग जाते हैं. यह समस्या अधिकतम व न्यूनतम तापमान में जब ज्यादा अंतर होने के कारण भी होता है जो मौसम का मिजाज बना हुआ है. यह मौसम आलू ही नहीं बल्कि गेहूं और अन्य फसलों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है. सिपाया कृषि केंद्र के वैज्ञानिक राजेंद्र प्रसाद की मानें, तो किसानों को इस मौसम में थोड़ी मेहनत करने की जरूरत है. उन्होंने इस रोग से निबटने के लिए कई टिप्स भी दिये. दो प्रकार के रोगअगैती: इसमें रोग पौधे के ऊपरी हिस्से में लगता है.-पिछैती:- इसमें रोग पौधे के निचले हिस्से में लगता है.-पहचान:- पौधे की पत्ती झुलस कर मर जाती है.दुष्परिणाम:- पैदावार कम होना, आलू के दाने छोटे-छोटे होना.बचाव के हैं उपायदेसी उपाय: फसल की वक्त पर सिंचाई करते समय पौधे को धुआं दिखाया जाये.तीन प्रकार के वैज्ञानिक उपाय1-मैन्कोब युक्त फफूंदी नाशक दवा रोग सुग्राही किस्मों पर 0.2 फसीद की दर से अर्थात दो किलोग्राम दवा एक हजार लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर फसल पर छिड़काव करें.2. ताइमोक्सेलिन और मैन्कोजब का तीन किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (एक हजार लीटर पानी के साथ) दर से छिड़काव करें.3. फेनोमिडोन व मैन्कोजेब का तीन किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (एक हजार लीटर पानी के साथ) की दर से छिड़काव करें.अभी कहीं से नहीं मिली शिकायतआलू व अन्य बागबानी फसलों पर झुलसा रोग के प्रकोप की सूचना नहीं मिली है. विगत एक दो-दिनों से आसमान में बादल और हवाओं का रुख बदला है. मौसम में आद्रता बढ़ी है. सुबह कुहरा भी पड़ रहा है. इससे डर बना हुआ है. डॉ वेदनारायण सिंह, डीएओ

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