तीन माह से बेरोजगारी झेल रहे 140 कनीय अभियंताओं का दूर हुआ संकट

Updated at :16 Jan 2016 6:27 PM
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तीन माह से बेरोजगारी झेल रहे 140 कनीय अभियंताओं का दूर हुआ संकट

तीन माह से बेरोजगारी झेल रहे 140 कनीय अभियंताओं का दूर हुआ संकट लघु जल संसाधन विभाग ने सभी कनीय अभियंताओं का काॅन्ट्रैक्ट एक वर्ष के लिए बढ़ाया कई कनीय अभियंता उड़न दस्ता टीम और मुख्य अभियंता कार्यालयों में लगाये गये जल संसाधन और लघु जल संसाधन विभाग के बीच कैडर विभाजन के पेंच में […]

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तीन माह से बेरोजगारी झेल रहे 140 कनीय अभियंताओं का दूर हुआ संकट लघु जल संसाधन विभाग ने सभी कनीय अभियंताओं का काॅन्ट्रैक्ट एक वर्ष के लिए बढ़ाया कई कनीय अभियंता उड़न दस्ता टीम और मुख्य अभियंता कार्यालयों में लगाये गये जल संसाधन और लघु जल संसाधन विभाग के बीच कैडर विभाजन के पेंच में फंसा था मामलाअभियंताओं की कमी से आठ जिलों की लघु सिंचाई योजनाओं का लटका था काम संवाददाता, पटना जल संसाधन और लघु जल संसाधन विभाग के बीच कैडर विभाजन के पेंच में नवंबर, 2015 से बेरोजगारी झेल रहे 140 कनीय अभियंताओं को बड़ी राहत मिली है. लघु जल संसाधन विभाग ने 140 अभियंताओं का काॅन्ट्रैक्ट एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है. सभी कनीय अभियंताओं को एक फरवरी से अपने-अपने डिवीजनों में योगदान देने को कहा गया है. कई कनीय अभियंताओं को उड़न दस्ता टीम और मुख्य अभियंता कार्यालयों में लगाया गया है. कैडर विभाजन में विलंब के कारण लघु जल संसाधन विभाग में संविदा पर बहाल 140 यांत्रिक कनीय अभियंता या तो दूसरी जरह काम की तलाश कर रहे थे या बेरोजगारी झेल रहे थे. शुक्रवार को उन्हें इस गंभीर संकट से निजात मिल गया. लघु जल संसाधन विभाग भी कनीय अभियंताओं का काॅन्ट्रैक्ट रिन्यूअल न होने से कम परेशान नहीं था. कई सिंंचाई योजनाओं के काम बाधित हो रहे थे. नवादा, जमुई, भागलपुर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, सीवान और छपरा की लघु सिंचाई योजनाओं का काम तकनीकी कारणों से चार माह से लटका था. कनीय अभियंताओं के कांॅन्ट्रैक्ट अवधि बढ़ने से इन योजनाओं के काम में अब तेजी आयेगी. आठों जिलों की सिंचाई योजनाओं का काम सितंबर-अक्तूबर, 2016 तक पूरा कराने का लक्ष्य है. इसके अलावा आहर-पाईन योजनाओं के काम में भी तेजी आयेगी. लघु जल संसाधन विभाग में मुख्य, अधीक्षण और कार्यपालक अभियंताओं के 243 पद पहले से ही रिक्त चल रहे हैं. इन पदों पर नयी बहाली के लिए विभाग ने अयोग को अक्तूबर-नवंबर, 2015 में ही लिखा है, हालांकि अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं मिली है. ऐसे में लघु जल संसाधन विभाग के लिए काॅन्ट्रैक्ट पर बहाल कनीय अभियंता ‘संकट-मोचक’ साबित होंगे.

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