अधिक उत्पादन के लिए छोड़ें परंपरागत खेती: कार्तिकेय

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अधिक उत्पादन के लिए छोड़ें परंपरागत खेती: कार्तिकेय 796433 मिट्टी स्वास्थ्य जांच कार्ड का किया गया वितरणसंवाददाता, पटनाकृषि निदेशक बी कार्तिकेय ने कहा है कि बेहतर और अधिक उत्पादन के लिए किसान परंपरागत खेती छोड़ें. वे कृषि संस्थान, बामेती में अंतरराष्ट्रीय मृदा दिवस के अवसर पर मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण समारोह को संबोधित कर रहे […]

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अधिक उत्पादन के लिए छोड़ें परंपरागत खेती: कार्तिकेय 796433 मिट्टी स्वास्थ्य जांच कार्ड का किया गया वितरणसंवाददाता, पटनाकृषि निदेशक बी कार्तिकेय ने कहा है कि बेहतर और अधिक उत्पादन के लिए किसान परंपरागत खेती छोड़ें. वे कृषि संस्थान, बामेती में अंतरराष्ट्रीय मृदा दिवस के अवसर पर मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए श्री कार्तिकेय ने कहा कि राज्य के किसानों को अधिक उत्पादन के लिए परंपरागत कृषि तरीकों को छोड़ वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा अपने खेतों की मिट्टी की वास्तविक स्थिति की जानकारी के अभाव में अनावश्यक रसायनिक खाद का प्रयोग करते हैं. इससे खेती की लागत जहां बढ़ जाती है, वहीं मिट्टी कास स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. श्री कार्तिकेय ने कहा कि अधिक उर्वरक के प्रयोग का प्रतिकूल प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को उनके खेतों के मिट्टी के नमूनों के जांच के बाद स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया गया है. इस अवसर पर बामेती के निदेशक गणेश राम ने कहा कि धरती स्वस्थ नहीं होगी तो खेत हरा भरा नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती से किसान अधिक उत्पादन ले सकेंगे, साथ ही उनकी लागत भी कम आयेगी. उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से सभी जिलों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है. राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के मृदा विज्ञान विभाग तथा सभी कृषि वज्ञिान केंद्रों में मिट्टी जांच प्रयोगशाला स्थापित किया गया है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 से बिहार राज्य में किसानों को वेब पर अधारित मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है. यह कार्ड विभागीय वेवसाइट पर भी उपलब्ध है, जिसे किसान डाउनलोड कर सकते हैं. मिट्टी स्वास्थ्य जांच दिवस के मौके पर 796433 कार्ड का वितरण किया गया. उन्होंने कहा कि तीन साल में सिंचित क्षेत्र के 12.25 लाख हेक्टेयर और असिंचित क्षेत्र के 2.27 लाख हेक्टेयर खेतों में के 1.52 करोड़ मिट्टी जांच की गयी. इसी दौरान मिट्टी जांच का 4.85 लाख नमूना संग्रह भी किया गया. इस मौके पर संयुक्त निदेशक रसायन, रामप्रकाश सहनी, अशोक प्रसाद, जिला कृषि पदाधिकारी राधारमण मौजूद थे.

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