वश्वि निमोनिया दिवस आज : निमोनिया से बचाव ही देगी जिंदगी

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विश्व निमोनिया दिवस आज : निमोनिया से बचाव ही देगी जिंदगी सही इलाज नहीं होने पर होता है जानलेवाबुजुर्गों के लिए खतरनाक है निमोनियासंवाददाता, गोपालगंजनिमोनिया फेफड़े का संक्रमण है. यह जीवाणुओं के कारण होता है. इसमें दोनों फेफड़ों या उनके कुछ हिस्सों में सूजन आ जाता है. पानी भी भर जाता है. वैसे तो यह […]

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विश्व निमोनिया दिवस आज : निमोनिया से बचाव ही देगी जिंदगी सही इलाज नहीं होने पर होता है जानलेवाबुजुर्गों के लिए खतरनाक है निमोनियासंवाददाता, गोपालगंजनिमोनिया फेफड़े का संक्रमण है. यह जीवाणुओं के कारण होता है. इसमें दोनों फेफड़ों या उनके कुछ हिस्सों में सूजन आ जाता है. पानी भी भर जाता है. वैसे तो यह एक सामान्य रोग है. बचाव एवं इलाज संभव है. सही इलाज के अभाव में यह जानलेवा भी साबित होता है. हाल ही में शिशु रोगों पर आयोजित सेमिनार में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य रहे डॉ केपी कुशवाहा ने कहा था कि यह संक्रमण किसी को भी हो सकता है, पर कुछ बीमारियां एवं स्थितियां ऐसी हैं, जिसमें निमोनिया होने का खतरा अधिक होता है. मसलन शराब एवं नशा पीड़ित मरीज जो डायलिसिस पर है, हार्ट, फेफड़े, लीवर की बीमारियों के मरीज, मधुमेह, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी, गंभीर गुर्दा रोग, बुढ़ापा या कम उम्र (नवजात) एवं कैंसर तथा एड्स के मरीज जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, में बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.तीन तरीकों से होता है संक्रमण- सांस के रास्ते: खांसने या छींकने से-खून के रास्ते: डायलिसिस के कारण मरीज एवं अस्पताल के वह मरीज जो लंबे समय से आइवी लाइन पर हैं.-एसपीरेशन: मुंह एवं ऊपरी पाचन नली के स्रावों का फेफड़ों में चला जाना जो खांसी आने की प्रक्रिया के खराब हो जाने की वजह से होता है. यह हैं लक्षण-तेज बुखार, खांसी, सीने में दर्द, सांस फूलना, कुछ मरीजों में दस्त, उल्टी, व्यवहार में परिवर्तन जैसे मतिभ्रम, चक्कर, भूख न लगना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सर्दी लग कर शरीर ठंडा पड़ जाना, सिरदर्द, चमड़ी का नीला पड़ना इन जांचों से चलता है पताखून की जांच, छाती का एक्स-रे, बलगम में ग्राम स्टेन एवं कल्चर की जांच, खून के कल्चर की जांच कहते हैं चिकित्सकशहर के प्रमुख शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ रामप्रवेश सिंह का कहना है कि एंटीबायोटिक जो बीमारी का कारण बने हुए जीवाणु पर निर्भर करता है. अधिकतर मरीज ओपीडी में इलाज करा सकते हैं, पर अगर यह बीमारी किसी अन्य बीमारी के साथ जुड़ी हुई है एवं 60 साल के ऊपर की उम्र के व्यक्ति को हुई है या रोगी गंभीर रूप से बीमार है, तो अक्सर अस्पताल में भरती होकर इलाज कराना पड़ सकता है. एंटीबायोटिक के अतिरिक्त तरल पदार्थ का सेवन, आॅक्सीजन (अगर सांस तेज फूल रही है), नेबुलाइजेशन अन्य उपाय है.निमोनिया से बचावबीमारी ठंड के मौसम में ज्यादा होती है, अत: ठंड से बचना, यह बच्चों एवं वृद्ध लोगों में और अधिक महत्वपूर्ण है-अधिक-से-अधिक पानी का सेवन करना- धूम्रपान, शराब एवं अन्य नशा का पूर्णत: त्याग करना- मधुमेह एवं अन्य बीमारियों पर नियंत्रण-निमोनिया का सबसे प्रमुख कारण होता है- न्यूमोकोकस जीवाणु, अत: इससे बचने का वैक्सीन (टीका) उपलब्ध है.-65 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति, जटिल हृदय रोग से पीड़ित दमा एवं गंभीर सांस की बीमारियों के मरीज, मधुमेह एवं एड्स पीड़ित, शराब का नशा करनेवाले लोग एवं वह मरीज जिनकी तिल्ली निकाल दी गयी हो, को यह टीका अवश्य लगवाना चाहिए.

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