मनरेगा, इंदिरा आवास को लेकर केंद्र से टकराव की स्थिति
मनरेगा, इंदिरा आवास को लेकर केंद्र से टकराव की स्थितिराज्य ने कई केंद्रीय योजनाओं को लेकर लगाया है भेदभाव का आरोप संवाददाता,पटनाबिहार में महागंठबंधन की सरकार बनती है, तो केंद्र सरकार से टकराव की संभावना प्रबल है. राज्य सरकार के कई विभागों के मंत्रियों ने इसका इसका आगाज तो पहले ही कर दिया है. अब […]
मनरेगा, इंदिरा आवास को लेकर केंद्र से टकराव की स्थितिराज्य ने कई केंद्रीय योजनाओं को लेकर लगाया है भेदभाव का आरोप संवाददाता,पटनाबिहार में महागंठबंधन की सरकार बनती है, तो केंद्र सरकार से टकराव की संभावना प्रबल है. राज्य सरकार के कई विभागों के मंत्रियों ने इसका इसका आगाज तो पहले ही कर दिया है. अब सरकार के मंत्री सरकार बनने का इंतजार भी कर रहे हैं. सरकार बनती है तो ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा और इंदिरा आवास को लेकर तो ग्रामीण कार्य विभाग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को लेकर केंद्र सरकार के सामने आपनी मांगों को दृढ़ता के साथ रखेगा. जब से केंद्र में भाजपा की सरकार आयी है, तब से राज्य सरकार केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लेकर भारत सरकार से अपनी आपत्ति जताते रही है. भाजपा के सत्ता में आने के बाद केंद्रीय योजनाओं में मैचिंग ग्रांट और सौतेलापन को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर करती रही है. केंद्र सरकार ने एक तिहाई आवासों की संख्या कम कर दी :ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार केंद्र सरकार से इंदिरा आवास में कटौती को लेकर कई बार विरोध भी जता चुके हैं. वे कहते रहे हैं कि पिछले वर्षों की तुलना में केंद्र सरकार ने एक तिहाई आवासों की संख्या कम कर दी है. प्रधानमंत्री कहते हैं कि सबको आवास उपलब्ध कराना है, तो इस अनुसार से तो उनका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा. इसके अलावा मनरेगा में केंद्र सरकार में सामग्री मद में केंद्र-राज्य का अनुपात 75:25 कर दिया है. इसको लेकर उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री को जुलाई में पत्र लिखा था, जिसका जवाब 14 अक्तूबर को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने राज्य सरकार को भेजा. इसमें स्पष्ट कर दिया है कि सामग्री मद की राशि में कोई परिवर्तन नहीं होगा. पहले लेवल का काम ही पूरा नहीं हुआ हैप्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 20 हजार किलोमीटर सड़कों की राशि का मुद्दा भी प्रमुख है. इसके अलावा राज्य के लिये अन्य बसावटों को जोड़ने के लिए स्वीकृति का मुद्दा प्रमुख है. दूसरे राज्यों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत दूसरे लेवल का काम किया जा रहा है, जबकि बिहार में पहले लेवल का काम ही पूरा नहीं हुआ है. यहां की 20 हजार किलोमीटर की सड़कों का निर्माण कार्य अभी पूरा होना शेष है. ऐसी स्थिति में अगर महागंठबंधन की सरकार बनती है, तो राज्य सरकार केंद्र सरकार पर इसको लेकर राजनीतिक लड़ाई शुरू कर देगा.
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