किसानों को मिला सर्फि धोखा
किसानों को मिला सिर्फ धोखा जिलेे के 1.85 लाख किसानों का बिखर गया अरमानचीनी मिल चालू कराने के नाम पर होती रही सियासतचुनाव के वक्त नेताओं को याद आती है चीनी मिल की दुर्दशाचुनावी मुद्दाफोटो-5, 6,7संवाददाता, मीरगंजहथुआ की एसकेजी शूगर मिल मीरगंज में स्थित है. बिहार सरकार ने इसे अधिगृहीत किया. चीनी मिल लालू प्रसाद […]
किसानों को मिला सिर्फ धोखा जिलेे के 1.85 लाख किसानों का बिखर गया अरमानचीनी मिल चालू कराने के नाम पर होती रही सियासतचुनाव के वक्त नेताओं को याद आती है चीनी मिल की दुर्दशाचुनावी मुद्दाफोटो-5, 6,7संवाददाता, मीरगंजहथुआ की एसकेजी शूगर मिल मीरगंज में स्थित है. बिहार सरकार ने इसे अधिगृहीत किया. चीनी मिल लालू प्रसाद के शासनकाल में बंद हो गयी. सेल्स टैक्स की करोड़ों राशि जमा नहीं करने के कारण बंद होने की बात कही जा रही थी. 1.85 लाख किसान इस उम्मीद में रहे कि सरकार आज नहीं तो कल कोई निर्णय जरूर लेगी. उम्मीद में 19 वर्ष बीत गये हैं. राजनेताओं को चुनाव के वक्त यह चीनी मिल याद आती है. लाचार किसान एक नयी उम्मीद के साथ आनेवाले कल का इंतजार करते हैं. चीनी मिल का अधिकतर पार्ट्स सड़ चुका है. चोरों ने लोहे की चोरी कर ली है. एक नजर में हथुआ चीनी मिल- श्रीकृष्ण ज्ञानोदय शूगर मिल हथुआ की स्थापना-1932- चीनी मिल के घाटे में जाने से मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर की कैबिनेट ने अधिगृहीत किया 1978 में- चीनी मिल प्रबंधन मामले को कोर्ट में ले गये. पुन: 1980 में सरकारी अधिग्रहण कोर्ट ने हटाया.- पुन: चीनी मिल घाटे में जाने के कारण 1985 में बिहार सरकार ने चीनी मिल को अधिगृहीत किया.- 1996 में चीनी मिल के घाटे में जाने के कारण सरकार ने बंद कर दिया. चीनी मिल बंद होने से इनको हुई क्षति- चीनी मिल बंद होने से कार्यरत-1800 कर्मी भुखमरी के शिकार हुए.- 700 कर्मियों की वेतन, पेंशन एवं अन्य राशि नहीं मिलने से तिल-तिल कर मौत हुई.- जिले के 795 गांवों के किसानों की गन्ने की राशि भी बकाया रह गयी.- 1.85 लाख किसानों की नकदी फसल का कारोबार चौपट हो गया.- चीनी मिल बंद होने से अधिकतर किसान परिवार को भी अन्य प्रदेशों में मजदूरी के लिए जाना पड़ा. चीनी मिल के लिए हुआ था आंदोलन- 1998 में चीनी मिल कर्मियों को जब स्पष्ट हो गया कि मिल नहीं चलेगी, तो कर्मी एक माह तक आंदोलन तक रहे.- 1999 में पटना के हड़ताली चौक पर चीनी मिल यूनियन की तरफ से प्रदर्शन किया गया.- वर्ष 2001 में किसान और चीनी मिल कर्मी 45 दिनों तक लगातार आंदोलन पर रहे.- 2005 में विधानसभा चुनाव के पहले एक सप्ताह का सामूहिक धरना आयोजन मिल के गेट पर हुआ.- 2008 में 48 कर्मियों की पैसे के अभाव में दवा नहीं होने से मौत के बाद चीनी मिल यूनियन के नेताओं ने आंदोलन किया.चीनी मिल चालू कराने के लिए दिखाया गया सपना- फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में सीएम नीतीश कुमार ने चीनी मिल चालू कराने का वादा किया.- फरवरी 2005 के चुनाव में पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने हथुआ की जनसभा में चीनी मिल चालू कराने का भरोसा दिलाया. – वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार, सुशील मोदी, शाहनवाज हुसैन ने चीनी मिल चालू कराने का भरोसा दिलाया.- 2010 के विधानसभा चुनाव में भी हथुआ चीनी मिल को चालू कराने का सपना दिखा कर वोट बटोरा गया.क्या कहते हैं यूनियन के नेताचीनी मिल सरकार के अधिग्रहण करने के बाद बंद हुई. नियमानुसार सभी कर्मी सरकारी हो गये. चीनी मिल बंद होने के बाद वेतन भी नहीं मिला. इन कर्मियों का कहीं समायोजन भी नहीं किया गया. अधिकतर कर्मी दवा और इलाज के पैसा नहीं होने से मौत के शिकार हो गये. हम यूनियन की तरफ से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं. बलराम सिंह, सचिव, चीनी मिल कर्मचारी यूनियन, हथुआक्या कहते हैं विधायकहथुआ चीनी मिल को चालू कराने के लिए राज्य सरकार ने टेंडर निकाला. टेंडर डालने के लिए कोई कंपनी नहीं आयी. प्रयास किया जा रहा है कि चीनी मिल को चालू किया जाये.रामसेवक सिंह, विधायक, हथुआ
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