बजरंगी भाई चाय दुकान पर सियासत की विसात

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बजरंगी भाई चाय दुकान पर सियासत की विसात खेत-खलिहान से लेकर राजनीतिक की हो रही चर्चाचुनाव के हर गतिविधि पर रखी जा रही नजरनुक्कड़ चर्चा : फोटो- 1संवाददाता, मांझाप्रखंड मुख्यालय पर स्थित बाजार में बजरंगी भाई की चाय दुकान पर इन दिनों सियासत की विसात बिछ रही है. यहां चाय और नाश्ते के साथ चुनाव […]

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बजरंगी भाई चाय दुकान पर सियासत की विसात खेत-खलिहान से लेकर राजनीतिक की हो रही चर्चाचुनाव के हर गतिविधि पर रखी जा रही नजरनुक्कड़ चर्चा : फोटो- 1संवाददाता, मांझाप्रखंड मुख्यालय पर स्थित बाजार में बजरंगी भाई की चाय दुकान पर इन दिनों सियासत की विसात बिछ रही है. यहां चाय और नाश्ते के साथ चुनाव के ताजा रुझान का रिले तत्काल हो जाता है. शनिवार की दोपहर राजन सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री मीसा भारती की चुनावी सभा के बाद यहां कंस मामा को लेकर विवाद बहस छिड़ा हुआ था. इस बार उर्फ सांसद अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव बरौली विधानसभा क्षेत्र से गरीब जनता दल सेकुलर के प्रत्याशी हैं. मधु सरेया में उनकी भांजी मीसा भारती ने अपने मामा साधु यादव को कंस की संज्ञा दी. बगल में बैठे चाय की चुश्की के साथ लाल वचन दुबे इस बहस में शामिल हो जाते हैं. वह कहते हैं कि मामा के चुनाव लड़ने से भांजी की पार्टी की बेचैनी जायज है. शिक्षक धर्मवीर यादव भी इस चर्चा में शामिल होकर पिछले दो दशक के विकास कार्यों पर सवाल खड़े करते हैं. आज मांझा में डिग्री कॉलेज, पावर सब स्टेशन का चालू नहीं होना मुख्य सड़कों के जर्जर होने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करते हैं. ललन पटेल जवाब देते हैं कि मांझा के विकास के लिए एक ईमानदार और कर्मठ विधायक की जरूरत है. यहां तो पुराने चेहरों को ही राजनीतिक दलों ने उतारा है. अरविंद रजक कहते हैं कि जो है उसी में अच्छा चुनना होगा. मजबूत लोकतंत्र के लिए हम सब का वोट काफी महत्वपूर्ण होगा. समय तो अब अपने ही पाले में है. बलेश्वर प्रसाद भी चुप कैसे बैठे. वे भी बिहार की सियासत पर कुछ राजनीति करते हैं. वे कहते हैं कि बिहार में जब तक पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बनेगी यहां का विकास संभव नहीं होगा. बिहार के विकास के लिए एक बार सोच कर वोट देने की जरूरत है. संदीप कहते हैं कि दो चरण के चुनाव में किसका पलरा भारी है कोई एनडीए को भारी बताने लगा तो कोई महागंठबंधन को भारी बताने लगा. बात बरौली विधानसभा पर आकर टिक गयी. अलग-अलग तीन खेमे में लोग बंट गये. कोई पूर्व पर्यटन मंत्री रामप्रवेश राय की जीत का दावा करने लगा, तो कोई राजद प्रत्याशी मो नेमतुल्लाह की जीत पक्का बताने लगा, तो तीसरा गुट साधु यादव की जीत पर बाजी लगाने लगा. सबसे पास अपना तर्क और जातीय गणित आधार था.

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