बीफ के बयान पर अटल डॉ रघुवंश, कहा

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बीफ के बयान पर अटल डॉ रघुवंश, कहासाधु-संतों को नहीं है धर्मग्रंथ का ज्ञान- वेद-पुराण व महाभारत जैसे धर्म ग्रंथ से धर्माचार्यों की अज्ञानता चिंता का विषयपिछले दो सौ साल से गौ-मांस खाना पाप के समान माना जा रहा फोटो माधव : 21 प्रेस वार्ता करते डॉ रघुवंश संवाददाता, मुजफ्फरपुरपूर्व केंद्रयी मंत्री डॉ रघुवंश प्रसाद […]

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बीफ के बयान पर अटल डॉ रघुवंश, कहासाधु-संतों को नहीं है धर्मग्रंथ का ज्ञान- वेद-पुराण व महाभारत जैसे धर्म ग्रंथ से धर्माचार्यों की अज्ञानता चिंता का विषयपिछले दो सौ साल से गौ-मांस खाना पाप के समान माना जा रहा फोटो माधव : 21 प्रेस वार्ता करते डॉ रघुवंश संवाददाता, मुजफ्फरपुरपूर्व केंद्रयी मंत्री डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि बीफ पर दिये गये बयान पर वे आज भी अटल हैं. दुख तो इस बात की है कि हिंदुओं को उनके धर्म के बारे में जानकारी देने वाले धर्माचार्यों को ही धर्म ग्रथों के बारे में सही जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि वैदिक और उत्तर वैदिक काल में हिंदू गो-मांस खते थे, इसका प्रमाण वेद-पुराण, शतपथ ब्राह्मण, याझबप, मनु स्मृति, महाभारत जैसे ग्रंथ में है. उन्होंने कहा कि हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नहीं है, मैंने वही कहा जो वेदों में वर्णित है. भाजपा को धर्म ग्रंथ के बारे में जानकारी नहीं है, यह तो ठीक है, लेकिन साधु-संत और धर्माचार्यों को भी जानकारी नहीं होना चिंता का विषय है. श्री सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर बहस चलाने की जरूरत है, गो मांस पर राजनीति नहीं होनी चाहिये. उन्होंने कहा कि मौर्य काल के बाद से मुगल शासन तक गो-हत्या पर रोक लगाने की बात इतिहास में है. बाबर ने हुमायूं को सलाह दी थी कि गो-हत्या पर पाबंदी लगे. अकबर और जहांगीर ने तो आदेश जारी कर दिया. 17 वीं शताब्दी में शिवाजी और सिखों के कूका आंदोलन में लोगों को गाय के नाम पर एकजुट किया गया. इसके बाद इतिहास कि लंबी यात्रा तय करने के बाद गाय को गो-माता का दर्जा दिया गया. उन्होंने कहा कि करीब 200 वर्षों से गो-मांस खाने को महापाप समझा जाता है, जबकि वेद-पुराणों में गो-मांस खाने का पुख्ता प्रमाण हैं.

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