यूपी से खाली हाथ लौटी पुलिस, छापेमारी जारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Feb 2020 1:05 AM (IST)
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विजयीपुर : आर्यन हत्याकांड के 72 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं. एक आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन फरार चल रहे दो आरोपित पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं. हालांकि उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लग रहा है. […]
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विजयीपुर : आर्यन हत्याकांड के 72 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं. एक आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन फरार चल रहे दो आरोपित पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं.
हालांकि उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लग रहा है. यूपी से खाली हाथ पुलिस की एक टीम वापस लौट आयी है. मोबाइल लोकेशन के भरोसे की कार्रवाई सिमट गयी है. उधर, घटना के 72 घंटे बाद भी तीन साल के मासूम आर्यन की मां रीता देवी बेसुध पड़ी है, तो वहीं गांव में अभी भी सन्नाटा पसरा है.
रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले लोगों जिंदगी मानों थम-सी गयी है. बता दें कि रविवार की दोपहर दो बजे विजयीपुर थाना क्षेत्र तेतरिया गांव निवासी जगदीश यादव का पुत्र आर्यन कुमार अपने भाई अंश के साथ दरवाजे पर खेल रहा था. फिर अचानक से वो गायब हो गया और अगले ही दिन सोमवार का उसका शव उसके घर पर एक गौशाला से बरामद किया गया था.
पुलिस को है मोबाइल के लोकेशन का भरोसा
मां पूछ रही सवाल, क्या बिगाड़ा था मेरे आर्यन ने
विजयीपुर : इस तस्वीर को जरा गौर से देखिए. ये वही मां जिसकी गोद उन्हीं लोगों ने उजाड़ दी, जिन्हें कभी वह अपना समझती थी. उसकी सुनी आंखों के दर्द को समझिए, चेहरे पर शून्य का भाव. बार-बार आंचल को निहारतीं आंखें. अचानक उसकी निद्रा टूटती है और वो फिर अपने आंचल से उन आंखों को पोछने लगती है, जिनके आंसू अब सूख चुके हैं. वो धार अब नहीं निकल रही है. चेहरे के भाव यह बताने के लिए काफी है कि वह कितना दर्द सह रही है.
जमीन पर बैठ कर शून्य को निहारती आंखें एक सवाल पूछ रही हैं कि उस मासूम ने किसी का क्या बिगाड़ा था. कम-से-कम मेरे लाल की जिंदगी तो बख्स देते. पास ही उसकी बहन बैठी है. उसके हाथों में दूध की वो कटोरी है, जिसमें कभी आर्यन दूध पीता था. उ कटोरी को देख कर उसकी आंखें भी नम हो जा रही हैं.
फिर अचानक से रीता देवी उठती है और कटोरी अपनी बहन सरिता के हाथों से छीन कर अचानक चूल्हे की ओर दूध गर्म करने जाती है और कहती है कि मेरे बाबू को भूख लगी होगी. सहसा उसे यह एहसास होता है कि अब दूध पीने वाला मासूम ऐसी दुनियां में चला गया है, जहां कोई वापस नहीं आता. बस यहां यादें ही शेष रह जाती हैं. उसे विश्वास है कि उसके जिगर का टूकड़ा जरूर आयेगा.
फिर परिवार के अन्य सदस्य पहुंचते हैं. बदहवास हो चुकी रीता को संभालने की कोशिश करते हैं. अचानक रीता चौंक जाती है. आंचल को छूने से मना करती है. कहती है कि मत छू मेरा बाबू मेरे आंचल में सोया है. ये शब्द हर किसी के सीने को छलनी कर देते हैं. अचानक फिर से रोने-पीटने का माहौल हो जाता है. न जाने इस दर्द से परिवार कब उबर पाये.
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