हथुआ के तत्कालीन एसडीपीओ समेत दो पर गैर जमानतीय वारंट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Nov 2019 2:08 AM (IST)
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गोपालगंज : जख्म प्रतिवेदन बदलवाकर हत्या का मामला बनाये जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए सीजेएम चंद्रमणि कुमार के कोर्ट ने हथुआ के तत्कालीन एसडीपीओ इम्तेयाज अहमद खां व कांड की विवेचना में शामिल गुलाम अहमद के खिलाफ गैर जमानतीय वारंट जारी किया है. कोर्ट ने दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश […]
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गोपालगंज : जख्म प्रतिवेदन बदलवाकर हत्या का मामला बनाये जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए सीजेएम चंद्रमणि कुमार के कोर्ट ने हथुआ के तत्कालीन एसडीपीओ इम्तेयाज अहमद खां व कांड की विवेचना में शामिल गुलाम अहमद के खिलाफ गैर जमानतीय वारंट जारी किया है. कोर्ट ने दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कराने का आदेश दिया है.
पुलिस अगर दोनों की गिरफ्तारी नहीं कर पाती है तो कोर्ट से इनका संपत्ति कुर्क करने का इश्तेहार जारी होगा. कोर्ट के सामने जख्म प्रतिवेदन तैयार करनेवाले हथुआ के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार ने कहा है कि पुलिस ने दबाव बनाकर जबरन जख्म प्रतिवेदन बनवाया है. डॉक्टर ने जख्म प्रतिवेदन में हेराफेरी करने की बात स्वीकार करते हुए कोर्ट से माफी मांग ली है.
उचकागांव थाने के बंकीखाल गांव के धर्मनाथ तिवारी तथा मुन्ना तिवारी के बीच 27 अक्तूबर, 2017 को मारपीट हुई थी. घायलों को हथुआ अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर अनिल कुमार ने जख्म प्रतिवेदन तैयार कर दिया. उचकागांव थाना कांड संख्या 227/2017 दर्ज किया गया. तीन दिनों के बाद कांड के सूचक धर्मनाथ तिवारी के परिजन प्रभुनाथ तिवारी मीरगंज दी सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में कैश लेने गये थे, जहां वे गिर गये.
इलाज के लिए डॉ केएन दुबे के यहां ले जाया गया, जहां से रेफर कर दिया गया. रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी. 30 अक्तूबर, 2017 को जख्म प्रतिवेदन में हेराफेरी कर प्रभुनाथ तिवारी का नाम जोड़ा गया था. जख्म प्रतिवेदन में प्रभुनाथ तिवारी का नाम जुटने के बाद घटना हत्या में तब्दील हो गया.
कोर्ट ने पर्यवेक्षण में पुलिस अधिकारियों को माना दोषी
पुलिस ने जब हत्या का मामला दर्ज किया तो पीड़ित मुन्ना लाल तिवारी ने सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दाखिल कर न्याय की अपील की, जिसमें ट्रायल नं 1965/19 में सीजेएम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई.
अधिवक्ता खजांची मिश्रा ने बताया कि इस घटना में जख्म प्रतिवेदन में हेराफेरी व पुलिस अधिकारियों के द्वारा जान बूझकर गलत जख्म प्रतिवेदन तैयार कराने को प्रथम द्रष्टया दोषी पाते हुए कोर्ट ने 22 अप्रैल, 2019 को संज्ञान लिया गया. सात मई को कोर्ट ने सम्मन जारी किया. 24 जुलाई को वारंट जारी किया गया था. जब वारंट पर ये अधिकारी नहीं आये तो उन पर गैर जमानतीय वारंट जारी किया गया है.
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