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बरौली अस्पताल में खतरे में डाल दी प्रसूता की जान, नवजात की मौत

Updated at : 07 Aug 2019 2:29 AM (IST)
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बरौली अस्पताल में खतरे में डाल दी प्रसूता की जान, नवजात की मौत

बरौली : बरौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार को स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही से नवजात की मौत हो गयी. मौत से नाराज परिजनों ने हंगामा करते हुए स्वास्थ्यकर्मियों के साथ झड़प की. इस दौरान अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गयी. डॉक्टर के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ. खजुरिया गांव के शत्रुधन कुमार की पत्नी संगीता […]

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बरौली : बरौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार को स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही से नवजात की मौत हो गयी. मौत से नाराज परिजनों ने हंगामा करते हुए स्वास्थ्यकर्मियों के साथ झड़प की. इस दौरान अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गयी. डॉक्टर के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ.

खजुरिया गांव के शत्रुधन कुमार की पत्नी संगीता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार की रात पीएचसी में भर्ती कराया गया. महिला को सामान्य प्रसव हुआ, जिसके बाद नवजात को ऑक्सीजन लगा दिया गया. परिजनों ने मंगलवार की सुबह में नवजात की स्थिति बिगड़ने पर एएनएम को सूचना दी.
ड्यूटी पर मौजूद एएनएम ने नवजात के गंदा पीने की बात कहते हुए खुद से साफ करने की सलाह परिजनों को दी. परिजनों ने डॉक्टर को बुलाने की मांग की.
इस पर नाराज होकर एएनएम ने इलाज करने से इन्कार कर दिया. इस बीच नवजात की मौत हो गयी. मौत की खबर मिलते ही महिला के घर से काफी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गये और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे. ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विजय कुमार पासवान ने एएनएम की लापरवाही बतायी.
डॉक्टर ने कहा कि नवजात के बीमार होने तथा प्रसव होने की सूचना तक नहीं दी गयी. डॉक्टर ने कहा कि एएनएम के मनमानी के कारण मरीजों को परेशानी हो रही है. डॉक्टर ने पीड़ित परिजनों को समझा कर शांत कराया. बाद में एंबुलेंस से परिजनों को घर भेजा गया. इस मामले में परिजनों ने डीएम और सिविल सर्जन के पास शिकायत करने की बात कही है.
क्या कहते हैं सीएस
नवजात के मौत की जानकारी नहीं है. इस तरह की घटना हुई है, तो प्रभारी से रिपोर्ट तलब की जायेगी. जांच कर दोषी पर कार्रवाई होगी.
डॉ नंदकिशोर सिंह, सिविल सर्जन, गोपालगंज
पहले भी जा चुकी है जान विभाग नहीं ले रहा एक्शन
बरौली .बरौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नवजात की मौत का यहपहला मामला नहीं है. इसके पहले भी नवजात और प्रसूता की जान जा चुकी है. डॉक्टर और एएनएम के बीच आपसी समन्वय नहीं होने का खामियाजा मरीजों को भुगतनी पड़ी रही है. बीते सात दिनों में प्रसूता समेत तीन नवजात की मौत अस्पतालकर्मियों की लापरवाही से हो चुकी है.
केस-1
बीते तीन अगस्त को थाना क्षेत्र के कोटवा गांव के जलालुद्दीन की पत्नी चांद तारा खातून का सामान्य प्रसव हुआ. प्रसव के बाद नवजात की स्थिति बिगड़ने लगी. बाद में एएनएम ने उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया. ड्यूटी पर तैनात डॉ देवकांत को इसकी सूचना तक नहीं थी. रास्ते में नवजात की मौत हो गयी. परिजनों ने शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. चांद तारा खातून का पहला बच्चा हुआ था.
केस-2
बरौली के सोनबरसा के नागेंद्र महतो की पत्नी सुनीता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर 30 जुलाई को भर्ती कराया गया. एएनएम ने इलाज किया. हालत बिगड़ने पर सदर अस्पताल रेफर कर दिया, जहां जच्चे-बच्चे की मौत हो गयी.
डॉक्टरों ने मौत का कारण खून की कमी होना बताया, लेकिन बरौली अस्पताल में परिजनों को इसकी जानकारी नहीं दी गयी. परिजनों को खून के कमी होने की जानकारी हो जाती, तो जान बचायी जा सकती थी.
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