जिनकी जमाबंदी रद्द थी उन्हीं के नाम सीओ ने कर दी अनुशंसा
Updated at : 12 Mar 2019 7:35 AM (IST)
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गोपालगंज : यह सुनकर आप आश्चर्य में पड़ेंगे. आपका थोड़ी देर के लिए झल्ला जायेंगे, बात तो सोलह आने सच है. अपर समाहर्ता के कोर्ट ने जिनके नाम पर चल रही जमाबंदी को रद्द किया, उन्हीं के नाम पर पुन: जमीन की जमाबंदी कायम करने के लिए विजयीपुर के सीओ ने अनुशंसा कर दी. न्याय […]
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गोपालगंज : यह सुनकर आप आश्चर्य में पड़ेंगे. आपका थोड़ी देर के लिए झल्ला जायेंगे, बात तो सोलह आने सच है. अपर समाहर्ता के कोर्ट ने जिनके नाम पर चल रही जमाबंदी को रद्द किया, उन्हीं के नाम पर पुन: जमीन की जमाबंदी कायम करने के लिए विजयीपुर के सीओ ने अनुशंसा कर दी. न्याय पाने की उम्मीद में गरीबी, बेबसी, अभाव से जूझ रहे नगीना राम उम्र के अंतिम पड़ाव में पहुंच गये हैं. कब सांस निकल जाये कहना मुश्किल है.
नगीना राम इस करप्ट सिस्टम से अकेले जंग लड़ रहे हैं. दिन भर रिक्शा चलाकर उससे आनेवाले पैसों को वकील की फीस व मुकदमे का खर्च वहन करते हैं. उनके इस जख्म पर मरहम लगाने वाले अधिकारी खामोश हैं. अधिकारियों की खामोशी ने पीड़ित रिक्शाचालक की धड़कन बढ़ा दी है. उन्हें न्याय मिल भी पायेगा, भरोसा उठता जा रहा है.
क्या है पूरा मामला : विजयीपुर थाने के सुमेरपुर गांव निवासी नगीना राम के दादा जगन राम के नाम पर दो कट्ठा आठ धूर जमीन प्रति कदिम बसवार वगैरह के नाम से खतियान में दर्ज थी.
नियमानुसार जमीन की जमाबंदी नगीना राम के नाम से होनी चाहिए थी, लेकिन पड़ोसी ने पीपीएस का पर्चा 1992-93 में कटा लिया. इसकी जानकारी जब पीड़ित को मिली तो उन्होंने डीसीएलआर के कोर्ट में शिकायत दर्ज करायी. डीसीएलआर ने मामले को सही पाते हुए डीएम के यहां जमाबंदी रद्द करने की अनुशंसा की.
डीएम ने 20 सितंबर, 2013 को डीएम ने इस मामले में सीओ के द्वारा दिये गये पर्चा को तथ्यों का दोष और तकनीकी भूल माना, जबकि अपर समाहर्ता के कोर्ट ने 15 जून, 2018 को स्पष्ट आदेश में नौ डिसमिल जमीन की जमाबंदी नं 145 नथुनी राम वगैरह की जमाबंदी को रद्द कर दिया तथा नगीना राम के आवेदन को स्वीकृत किया.
पीड़ित रिक्शाचालक न्याय की उम्मीद में भटक रहे सड़कों पर
विजयीपुर के सीओ को नगीना राम के नाम से जमीन की जमाबंदी कायम करने के लिए अनुशंसा करना था, लेकिन जिस जमाबंदी को रद्द कराने में नगीना राम को आठ वर्ष लगे. पुन: उन्हीं लोगों के नाम पर जमाबंदी करने के लिए सीओ ने अनुशंसा कर दी. नगीना राम इन दिनों शहर की सड़कों पर आंखों में आंसू और न्याय की उम्मीद लिए भटक रहे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
पूरा मामला मेरे संज्ञान में नहीं है. अगर ऐसा है तो इस मामले की जांच कर न्यायपूर्वक कार्रवाई की जायेगी.
अनिल कुमार रमण, एसडीओ, हथुआ
पिछले आठ वर्षों से जिले की सड़कों पर न्याय के लिए रिक्शा चला रहे नगीना
सीओ की अनुशंसा के बाद हथुआ के एसडीओ के यहां लंबित है मामला
उम्र के आखिरी पड़ाव में पहुंचे पीड़ित का टूट रहा न्याय से भरोसा
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