नल जल योजना की राशि निकासी पर प्रशासन ने लगायी रोक

संजय कुमार अभय गोपालगंज : मुख्यमंत्री के सात निश्चय में शामिल नल-जल योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने राशि के निकासी पर रोक लगा दी है. 34 पंचायतों में धांधली सामने आयी है, जिनके पंचायत सचिव और मुखिया पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है. प्रशासन के रडार […]
संजय कुमार अभय
गोपालगंज : मुख्यमंत्री के सात निश्चय में शामिल नल-जल योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने राशि के निकासी पर रोक लगा दी है. 34 पंचायतों में धांधली सामने आयी है, जिनके पंचायत सचिव और मुखिया पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है. प्रशासन के रडार पर कई पंचायतें हैं. डीएम अनिमेष कुमार पराशर के इस रुख से अधिकारियों के भी होश उड़े हुए है. नल-जल योजना में एकमुश्त आठ-आठ लाख की राशि निकाली गयी है, लेकिन राशि का हिसाब-किताब प्रशासन को उपलब्ध नहीं कराया गया है.
31 जुलाई तक हिसाब नहीं देने वाली पंचायतों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी में प्रशासन जुटा हुआ है. पंचायत के स्तर पर नल-जल योजना में गड़बड़ी की बात सामने आयी है. जानकार सूत्रों ने बताया कि डीएम इसका खुद मॉनीटरिंग कर रहे है. पंचायत में खर्च की गयी राशि का हिसाब और उसके सत्यापन के बाद ही भुगतान का आदेश मिल सकेगा.
बीपीएल को 30 और एपीएल परिवार को 60 रुपये देने हैं शुल्क
मुख्यमंत्री की सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल में अब लोगों को रखरखाव के लिए पैसे खर्च करने होंगे. गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले बीपीएल परिवारों को नल के पानी के लिए हर महीने 30 रुपये और एपीएल परिवारों को 60 रुपये देने होंगे.
क्या है नल जल योजना : लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) ने हर घर नल का जल योजना के लिए पंचायतों के गैर गुणवत्ता प्रभावित वार्डों में काम कराने के लिए मॉडल इस्टीमेट तैयार किया है. इसी इस्टीमेट के तहत पंचायतें 14वें वित्त आयोग और पंचम राज्य वित्त आयोग से प्राप्त होने वाली राशि से वार्डों में हर घर को नल का जल देने का काम करेंगी. योजना में पीएचईडी तकनीकी सहायता मुहैया करायेगा. इसके लिए मुखिया से मिलकर योजना पर काम शुरू करने का माहौल बनाने को भी कहा गया है.
घरों के हिसाब से 12 मॉडल इस्टीमेट बनाये गये
मॉडल इस्टीमेट को 100, 150 और 200 घरों पर बनाया गया है. कुल 12 मॉडल तैयार किये गये हैं. सात लाख से लेकर 11 लाख रुपये तक की लागत तय की गयी है. मॉडल इस्टीमेट में ट्यूबवेल के बोर करने, उसकी पैकिंग, पाइप की साइज और लाभान्वित होने वाले घरों को आधार बनाया गया है. विभाग गुणवत्ता प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में खुद काम कर रहा है. गैर गुणवत्ता प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में यह काम पंचायतों के माध्यम से होना है.
क्या कहते हैं अधिकारी
पंचायतों में नल-जल योजना में खर्च की गयी राशि का हिसाब-किताब तलब किया गया है. खर्च राशि का हिसाब मिलने के बाद ही नल-जल योजना के लिए राशि की अगली किस्त का भुगतान पंचायतें कर सकेंगी.
दयानंद मिश्र, डीडीसी, गोपालगंज
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