कृषि विभाग के बाबू नहीं जानते हाकिम का नाम

Published at :29 Nov 2017 6:05 AM (IST)
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कृषि विभाग के बाबू नहीं जानते हाकिम का नाम

लापरवाही. प्रभात खबर टीम पहुंची तो खाली िमला दफ्तर गोपालगंज : जिले की 85 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है. इसके लिए अलग से विभाग बनाया गया है, जिसमें मिट्टी की जांच के साथ अन्य चीजों की व्यवस्था की गयी है़ किसानों को यहां हर तरह की जानकारियां दी जाती हैं. लेकिन, स्थिति उलट है. […]

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लापरवाही. प्रभात खबर टीम पहुंची तो खाली िमला दफ्तर

गोपालगंज : जिले की 85 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है. इसके लिए अलग से विभाग बनाया गया है, जिसमें मिट्टी की जांच के साथ अन्य चीजों की व्यवस्था की गयी है़ किसानों को यहां हर तरह की जानकारियां दी जाती हैं. लेकिन, स्थिति उलट है. विभाग में साहब और कर्मचारियों को खोजना टेढ़ी खीर है. कृषि के अंतर्गत आनेवाले सभी दफ्तर एक ही बिल्डिंग में चलता है. मिट्टी जांच पदाधिकारी से लेकर मत्स्य पदाधिकारी के काम करने का दिन तय नहीं है. यहां आनेवाले किसान ऐसे ही लौट जाते हैं. मंगलवार को 11 से 12.30बजे तक प्रभात खबर की टीम कृषि कार्यालय में रही. इसमें कई कमियां सामने आयीं.
खाली थी मिट्टी जांच पदाधिकारी की कुर्सी
कृषि विभाग की बड़ी बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर मिट्टी जांच विभाग है. यहां साहब का चैंबर खाली है. कैमरा देख गोविंद कुमार और मंकेश्वर पुरी आये. साहब कब आते हैं, पूछने पर वे जवाब नहीं दे पाये. इन्हें साहब का नाम भी पता नहीं है. बाद में बताते हैं कि साहब प्रभार में हैं. कभी- कभी आते हैं. साहब के चैंबर को खुले हुए कितना दिन हुआ, के सवाल पर दोनों ने चुप्पी साध ली.
प्रयोगशाला में नहीं थे लैब टेक्नीशियन
जिले में मिट्टी की जांच के लिए लाखों रुपये की लागत से प्रयोगशाला बनायी गयी, जिससे किसानों को लाभ हो. किसान आते हैं, लेकिन यहां कोई नहीं मिलता है. प्रयोगशाला खुला था, लेकिन लैब टेक्नीशियन नहीं था. इसी दौरान बगल के कमरे से मंकेश्वर पुरी पहुंचे. उन्होंने बताया कि टेक्नीशियन ही मिट्टी की जांच करते हैं. पर यहां यह पद अभी खाली है़
मत्स्य विभाग में नहीं आये थे साहब व बाबू
कृषि भवन की तीसरी मंजिल पर मत्स्य विभाग का कार्यालय है. यहां बाबू के चैंबर में एक किसान बैठ कर इंतजार कर रहा है. पूछने पर किसान ने अपना नाम हीरा भगत बताया. उसने बताया कि वह पंचदेवरी से आया है. साहब नहीं हैं, जिस बाबू से काम है, वे भी नहीं हैं. जी हां, यहां भी अधिकतर कुर्सियां खाली हैं.
यहां किसी प्रकार की समस्या पर कोई जवाब देनेवाला नहीं है.
बंद था मत्स्य पदाधिकारी का चैंबर
दिन के 11:40 बजे मत्स्य पदाधिकारी की कुर्सी खाली थी. साहब कब आयेंगे, किसी को पता नहीं. कुछ देर इंतजार करने के बद सुपरवाइजर सुफियान पहुंचे. उन्होंने बताया कि साहब गुरुवार को आते हैं, लेकिन उनके आने निश्चित दिन नहीं है. अधिकारी का चैंबर तक बंद था़ कुछ लोग बाहर इंतजार कर रहे थे.
लेकिन उन्हें भी पता नहीं था कि साहब आयेंगे या नहीं.
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