पूर्णिया में गुस्साये डॉक्टरों ने अस्पताल का काम किया ठप, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम

पूर्णिया के भवानीपुर सीएचसी में असमाजिक तत्वों द्वारा ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक पर हुए जानलेवा हमले के बाद जीएमसीएच के गुस्साये डॉक्टरों ने एकजुट होकर कार्य का बहिष्कार करते हुए ओपीडी और जनरल वार्ड का काम पूरी तरह से ठप कर दिया.
रविवार को पूर्णिया जिले के भवानीपुर सीएचसी में एक प्रसूता की मौत के बाद आक्रोशित भीड़ द्वारा एक चिकित्सक की पिटाई के विरोध में जिले भर के चिकित्सकों का गुस्सा फूट पड़ा. सोमवार को इसके खिलाफ राजकीय मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (जीएमसीएच) के डॉक्टरों ने कार्य का बहिष्कार किया. ओपीडी और जनरल वार्ड का काम पूरी तरह ठप कर दिया. इसके चलते आम लोग इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे. सुबह से देर दोपहर तक डॉक्टर ओपीडी वार्ड से नदारद रहे. वहीं इमरजेंसी वार्ड का कामकाज भी काफी देर तक बाधित रहा. नाराज डॉक्टरों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे को आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. सिविल
डॉक्टरों ने एकजुट होकर मारपीट का किया विरोध
सर्जन डॉक्टर अभय कुमार चौधरी ने बताया कि प्रसूता की मौत के लेकर जिस प्रकार डॉक्टरों से मारपीट की गयी और अस्पताल में तोड़फोड़ की गयी, वह निंदनीय है. उन्होंने कहा कि जिस प्रसूता की मौत हुई है, उसके प्रति भी हमारी संवेदना है लेकिन इसके लिए डाक्टर की बेरहमी से मारपीट किया जाना पूरी तरह गलत है. सोमवार को जीएमसीएच के सभी डॉक्टरों ने एक जुट होकर इस घटना का विरोध किया. डाक्टरों ने ओपीडी और जनरल वार्ड से बाहर निकल गये और प्रदर्शन करने लगे. नाराज डाक्टर दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी और सुरक्षा की मांग कर रहे थे.
मंगलवार से काला बिल्ला लगा कर देंगे अपनी सेवा : डा. मुकेश
पूर्णिया डाक्टर्स केयर एसोसिएशन के संयोजक डा मुकेश कुमार ने कहा कि रविवार को भवानीपुर पीएचसी में कार्यरत डा. राजनारायण पर हथियारबंद अपराधियों द्वारा जानलेवा हमले से समस्त चिकित्सक समुदाय आक्रोशित और सदमे में है. अपराधियों को अविलंब यदि गिरफ्तार नहीं किया गया तो पूर्णिया डाक्टर्स केयर एसोसिएशन के सभी सदस्य इस हमले के विरोध में सड़क पर विरोध-प्रदर्शन के लिए तैयार हैं. डा. मुकेश ने प्रशासन से शीघ्र अपराधियों को गिरफ्तार करने एवं चिकित्सकों को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया है. कल से पूर्णिया डाक्टर्स केयर एसोसिएशन के सभी सदस्य डा राजनारायण पर हुए जान लेवा हमले के विरोध में काला बिल्ला लगा कर अपनी सेवा देंगे.
आइएमए की आपत बैठक बुलायी गयी: डा. ए के सिंहा
आइएमए के अध्यक्ष डा. ए के सिन्हा ने बताया कि भवानीपुर पीएचसी की घटना को लेकर एक आपात बैठक बुलायी गयी है. बैठक में इस घटना को लेकर आगे की रणनीति बनायी जायेगी. आइएमए ने दोषियों की गिरफ्तारी के लिए जिला प्रशासन को 24 घंटे की मोहलत दी है.
आइएमए बिहार ने गिरफ्तारी के लिए दी 24 घंटे की मोहलत
आई.एम.ए. बिहार ने अभियुक्तों की गिरफ्तारी एवं सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने तक भवानीपुर सी. एच. सी. अस्पताल के चिकित्सकों का कार्य बहिष्कार के निर्णय का समर्थन किया है. 24 घंटे के अंदर अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं होने की स्थिति में पुर्णिया के चिकित्सकों द्वारा लिये गये प्रत्येक निर्णय को आई.एम.ए. बिहार समर्थन देगा. राज्य सरकार इस बिंदु पर आई.एम.ए. बिहार से तुरंत वार्त्ता करें अन्यथा चिकित्सकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आई.एम.ए. बिहार राज्यव्यापी कठोर निर्णय लेने को बाध्य होगा.
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने आंदोलन की धमकी
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने भवानीपुर सीएचसी में असमाजिक तत्वों द्वारा ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक पर हुए जानलेवा हमले की तीव्र शब्दों में निंदा की है. संघ के अध्यक्ष डॉ॰ महेश प्रसाद सिंह नेस्वास्थय विभाग के अपर मुख्य को लिखे पत्र में कहा है कि इस घटना से पूरे राज्य के चिकित्सकों में रोष एवं भय व्याप्त है. इस डर के माहौल में कार्य करना असम्भव प्रतीत होता है. इस घटना से सभी चिकित्सक एपीएचसी से लेकर सदर अस्पताल एवं सभी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों में आक्रोश है. इसलिए 24 घंटे के अंदर दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती है तो ओ.पी.डी के अलावे आकस्मिक सेवा भी अनिश्चित कालीन बन्द करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, इसकी सारी जवाबदेही सरकार की होगी.
क्या है मामला
दरअसल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवानीपुर में प्रसव के दौरान महिला की मौत होने के बाद परिजनों ने चार घंटे तक हंगामा किया गया. इस दौरान अस्पताल में मौजूद डॉक्टर आरएन सिन्हा को चोटें पहुंची थी. मृतका के पिता जवाहर साह ने बताया कि प्रसव पीड़ा के दौरान उनकी पुत्री को समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवानीपुर लाया गया, जहां उपस्थित नर्सों द्वारा सुरक्षित डिलीवरी के लिए 15 सौ रुपये की मांग की गयी. इसे देने के बाद डिलीवरी सकुशल करा दी गयी, लेकिन उसके बाद में उनकी पुत्री का ब्लड रुक नहीं रहा था. दोपहर साढ़े बारह बजे के बाद सभी नर्स व डॉक्टर अस्पताल छोड़ कर फरार होने लगे, तब जाकर पता चला कि उसकी पुत्री की मौत हो चुकी है. प्रसूता की मौत की जानकारी मिलते ही रघुनाथपुर गांव के सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण अस्पताल पहुंच कर हंगामा किया था.
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