मगध विश्वविद्यालय में विश्व स्तनपान सप्ताह पर कार्यशाला, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर दिया गया जोर

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कार्यक्रम में शामिल गृह विज्ञान विभाग की छात्राएं व प्राध्यापक  | Prabhat Khabar Network

कार्यक्रम में शामिल गृह विज्ञान विभाग की छात्राएं व प्राध्यापक | Prabhat Khabar Network

मगध विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग ने विश्व स्तनपान सप्ताह पर एक अनूठी कार्यशाला आयोजित की. यह कार्यक्रम 'सावन में पौधारोपण: एक स्वस्थ पर्यावरण, एक स्वस्थ मां, एक स्वस्थ शिशु, एक सुरक्षित भविष्य' विषय पर केंद्रित रहा. इसमें मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन को एकीकृत किया गया.

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World Breastfeeding Week : मगध विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग द्वारा विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर 'सावन में पौधारोपण: एक स्वस्थ पर्यावरण, एक स्वस्थ मां, एक स्वस्थ शिशु, एक सुरक्षित भविष्य' विषय पर जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया.

कार्यक्रम को विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 की थीम 'जीवन की सतत एवं स्वस्थ शुरुआत के लिए स्तनपान: जो प्रभावी है, उसे और सशक्त बनाएं' से जोड़ते हुए मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत जीवनशैली के महत्व पर बल दिया गया.

वेस्ट से बेस्ट और उपयोगी वस्तुओं के निर्माण का प्रशिक्षण

कार्यशाला में दक्षिण बिहार के युवा शक्ति प्रमुख प्रिंस कुमार विशेष रूप से उपस्थित हुए. उन्होंने छात्राओं को 'वेस्ट से बेस्ट' की अवधारणा के अंतर्गत घरेलू अपशिष्ट एवं अनुपयोगी पदार्थों से उपयोगी वस्तुएं तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया.

उन्होंने वेस्ट सामग्री से फिनाइल, प्लास्टिक कचरे से ईको-ब्रिक तथा घर में उपलब्ध विभिन्न अनुपयोगी सामग्रियों से अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार करने की विधियां समझाईं.

इसके साथ ही कचरे के पृथक्करण, पुनरुपयोग और पुनर्चक्रण को दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया. कार्यशाला का विशेष आकर्षण 'पर्यावरण ताली' रही, जिसे प्रिंस कुमार ने छात्राओं को सिखाया. इसके माध्यम से स्वच्छता, पौधारोपण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी का संदेश सरल और सहभागितापूर्ण तरीके से दिया गया.

पर्यावरण संरक्षण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के बीच संबंध

कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं तथा आज की युवतियों, जो भविष्य की माताएं हैं, के स्वास्थ्य से विशेष रूप से जोड़ा गया.

बताया गया कि स्वस्थ मातृत्व एवं स्वस्थ शिशु के लिए पौष्टिक आहार के साथ-साथ शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, स्वच्छ परिवेश और प्रदूषण-मुक्त वातावरण भी अत्यंत आवश्यक हैं. पर्यावरण की गुणवत्ता का प्रभाव वर्तमान पीढ़ी के साथ आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है.

छात्राओं को पौधे प्रदान करने की पहल और संकल्प

इस अवसर पर गृह विज्ञान विभाग द्वारा छात्राओं को पौधे प्रदान किए गए, जिन्हें वे अपने घरों में लगाकर उनकी देखभाल करेंगी. इस पहल के माध्यम से छात्राओं को स्वयं पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनने तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया.

कार्यशाला ने स्तनपान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पौधारोपण और घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन को एक साझा उद्देश्य से जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि स्वस्थ एवं सुरक्षित भावी पीढ़ी के निर्माण के लिए स्वस्थ पर्यावरण आवश्यक है. कार्यक्रम 'स्वस्थ पर्यावरण–स्वस्थ मां–स्वस्थ शिशु–सुरक्षित भविष्य' के संकल्प के साथ संपन्न हुआ.

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Kalendra Pratap Singh

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