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दवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए अनुसंधान जरूरी

Updated at : 04 Dec 2025 5:37 PM (IST)
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दवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए अनुसंधान जरूरी

एसइआरबी परियोजना के तहत उत्क्रमित हाइस्कूल परसावां के विद्यार्थियों ने सीयूएसबी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग का किया भ्रमण

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एसइआरबी परियोजना के तहत उत्क्रमित हाइस्कूल परसावां के विद्यार्थियों ने सीयूएसबी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग का किया भ्रमण

हाइस्कूल परसावां के विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान के सामाजिक महत्व की दी जानकारी

वरीय संवाददाता, गया जी.

सीयूएसबी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने विज्ञान एवं अभियांत्रिकी अनुसंधान बोर्ड (एसइआरबी) भारत के सहयोग से उत्क्रमित हाइस्कूल परसवां के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान शिविर का आयोजन किया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के ध्यय ‘समुदाय के लिए विज्ञान’ विषय पर आधारित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक जिज्ञासा जगाने और जैव प्रौद्योगिकी की वास्तविक उपयोगिता से परिचित कराना था. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस शिविर का आयोजन एसोसिएट प्रोफेसर एवं परियोजना अन्वेषक डॉ नीतीश कुमार द्वारा संचालित शोध परियोजना ‘मखाना के आनुवंशिक सुधार के लिए इन विट्रो पुनर्जीवन प्रोटोकॉल का विकास’ के अंतर्गत आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम के दौरान डॉ नीतीश कुमार ने छात्रों को प्रयोगशालाओं का भ्रमण कराया, जहां उन्होंने शोध परियोजना के उद्देश्य, एसइआरबी की भूमिका व वैज्ञानिक अनुसंधान के सामाजिक महत्व को सरल भाषा में समझाया. सत्र की शुरुआत में डॉ नीतीश कुमार ने स्वागत भाषण में एसइआरबी की गतिविधियों में बारे बताया. डीन प्रोफेसर रिजवानुल हक ने उच्च शिक्षा व अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत को दवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए अनुसंधान को प्राथमिकता देनी होगी. आज कई दवाइयां आयात की जाती हैं, जिन्हें स्वदेशी अनुसंधान और तकनीकी विकास के माध्यम से देश में ही बनाया जा सकता है. इस कार्यक्रम का संचालन जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो राकेश कुमार ने शिविर समन्वयक के रूप में किया. उन्होंने छात्रों के लिए कई रोचक और उपयोगी गतिविधियों की शृंखला प्रस्तुत की, जिससे बायोटेक्नोलॉजी के विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक समझ विकसित हुई.

ज्ञान का सही दिशा में प्रयोग जरूरी

दैनिक जीवन में जैव प्रौद्योगिकी विषय पर व्याख्यान में डॉ नीतीश कुमार ने बताया कि कैसे जड़ी-बूटियों, पशु उत्पादों और औषधीय पौधों (जैसे मखाना) के विकास से लेकर प्रयोगशालाओं में किये जा रहे नवीन प्रयोगों तक बायोटेक्नोलॉजी उपयोगी है. उन्होंने यह भी समझाया कि ज्ञान प्राप्त करना जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण है उसे गहराई से समझना और सही दिशा में प्रयोग करना है. कैंप में छात्र अत्यधिक उत्साहित और जिज्ञासु दिखाई दिये. उन्होंने विविध वैज्ञानिक प्रश्न पूछे व प्रश्नोत्तर सत्र में बेहतरीन सहभागिता करने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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KALENDRA PRATAP SINGH

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