मगध की धरती ज्ञान, ध्यान व अनुसंधान की भूमि है : त्रिपाठी
Published by :KALENDRA PRATAP SINGH
Published at :21 Nov 2025 6:28 PM (IST)
विज्ञापन

मगध विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
विज्ञापन
मगध विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
वरीय संवाददाता, बोधगया.
मगध विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं समाज विज्ञान विषय पर शुक्रवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ, जिसमें विशेष अतिथि के रूप में राष्ट्रीय समाज विज्ञान परिषद के अध्यक्ष और इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रकाश मणि त्रिपाठी व दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर व राष्ट्रीय समाज विज्ञान परिषद के महामंत्री प्रो रामजीव लोचन मौजूद रहे. कार्यक्रम की शुरुआत दीप जला और सभी प्रमुख अतिथियों के स्वागत सत्कार से हुई. इस कार्यक्रम के आरंभ में राजनीति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर मो एहतेशाम खान ने औपचारिक स्वागत भाषण दिया. विशेष अतिथि त्रिपाठी ने अपने भाषण में भारतीय प्राचीन ऋषि मनीषियों और आचार्यों के समय से वेद, स्मृति, आरण्यक आदि से अब तक के अनुसंधान को बताते हुए भारतीय ज्ञान के समग्र विकास को दर्शाया. उन्होंने बताया कि ज्ञान वह है, जो वर्जनाओं से मुक्त करता है. उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि मगध की धरती एक साथ ज्ञान भूमि, ध्यान भूमि व अनुसंधान भूमि भी है. उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा की विशेषता संवेदनशीलता, समन्यवयवादिता और सहयोग है और ये तीनों मनुष्यता के उदात्त लक्षण है, जिससे ज्ञान परंपरा आगे बढ़ती है. भारतीय ज्ञान परंपरा का विशेष लक्षण है कि इसमें ज्ञानी व्यक्ति के बजाय विवेकी व्यक्ति को ज्यादा महत्व दिया जाता है. अर्थात, वह व्यक्ति, जो ज्ञान का समुचित उपयोग भी करना जनता हो. आधुनिक समय में जिस सतत विकास की बात की जा रही है, उसका सूत्र हम ईशावास्योपनिषद का प्रथम मंत्र में प्राप्त कर सकते हैं. हम प्रकृति से उतना ही प्राप्त करें, जितना हमारे लिए आवश्यक है. उसके उपभोग के साथ हम सृजन भी करें व अपने आगे की पीढ़ी के लिए भी छोड़ कर जाएं. उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि वर्तमान समाज को भारतीय ज्ञान परंपरा को आज पुनः अवगमन करने की आवश्यकता है.राष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान परिषद का जिक्र
कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलसचिव डॉ विनोद कुमार मंगलम ने नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशीला के ज्ञान पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि महायान बौद्ध धर्म प्रगतिशील होने के कारण अधिक आगे बढ़ा, लेकिन हीनयान बौद्ध धर्म कट्टरपंथी रहा और आगे नहीं बढ़ पाया. इस दौरान प्रो मुकेश कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा को एकीकृत भारत के निर्माण में योगदान को रेखांकित किया. अतिथि वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो अमरजीव लोचन ने गौतम बुद्ध के उपदेश में मगही की महत्ता को बताया व राष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान परिषद का भी जिक्र किया.कार्यक्रम में रहे शामिल
मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एसपी शाही के संरक्षण में डॉ अंजनी कुमार घोष ने कार्यक्रम का सफल आयोजन किया. इस कार्यक्रम में सचिव डॉ शमशाद अंसारी, डॉ मुकेश कुमार, डॉ एकता वर्मा, डॉ ममता मेहरा, प्रो डॉ मिनाक्षी, डॉ अंजनी कुमार घोष, डॉ निर्मला कुमारी, डॉ श्रद्धा ऋषि, डॉ प्रियंका सिंह, डॉ दिव्या मिश्रा व अविनाश कुमार के साथ शोधार्थी प्रिया सलोनी, आरती कुमारी, अर्चना कुमारी, अविनाश, कुंदन, अशोक कुमार के साथ अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




