बोधगया में गुरु पूर्णिमा पर गूंजीं विश्व शांति की प्रार्थनाएं, 130 भिक्षुओं ने किया संघदान

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रार्थना कर संघदान करते बौद्ध भिक्षु
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बोधगया में बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष पूजा और संघदान के साथ तीन महीने के वर्षावास की शुरुआत की। जानिए इस आयोजन की पूरी जानकारी।
Gaya Ji News : गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष पूजा-अर्चना कर विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की. मंदिर परिसर में पूरे दिन श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा.
130 बौद्ध भिक्षुओं और लामाओं ने किया सामूहिक संघदान
महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) कार्यालय परिसर में आयोजित संघदान कार्यक्रम में बोधगया में रह रहे विभिन्न देशों के लगभग 130 बौद्ध भिक्षु, भिक्षुणी और लामाओं ने भाग लिया. कार्यक्रम में जापान, ताइवान, तिब्बत, बांग्लादेश, भारत, म्यांमार सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए.
विश्व शांति और भाईचारे के लिए की गई प्रार्थना
महाबोधि मंदिर के मुख्य भिक्षु चालिंदा और मंदिर के केयरटेकर भिक्खु डॉ. दीनानंद के नेतृत्व में विशेष प्रार्थना का आयोजन किया गया. वहीं तिब्बत बौद्ध मठ के प्रभारी लामा आमजे के नेतृत्व में महायान परंपरा के लामाओं ने सूत्रपाठ किया. प्रार्थना के बाद सभी भिक्षुओं और भिक्षुणियों को संघदान के तहत भोजन कराया गया.
वर्षावास की शुरुआत, तीन महीने साधना में बिताएंगे भिक्षु
मुख्य भिक्षु चालिंदा ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के साथ बौद्ध भिक्षुओं का वर्षावास शुरू हो गया है. अगले तीन महीने तक भिक्षु और भिक्षुणियां एक स्थान पर रहकर साधना, अध्ययन और आध्यात्मिक अनुशासन का पालन करेंगे.
महायान और थेरोवाद परंपरा का बना विशेष संयोग
लामा आमजे ने बताया कि इस वर्ष विशेष संयोग बना है, क्योंकि थेरोवाद और महायान दोनों परंपराओं का वर्षावास गुरु पूर्णिमा से ही प्रारंभ हुआ है. उन्होंने बताया कि महायान परंपरा में दिन और रात दोनों की गणना होने के कारण उनका वर्षावास 45 दिनों का रहेगा.
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