Gaya News : भू-स्थानिक युग में जानकारी का उपयोग सावधानीपूर्वक होना चाहिए : कुलपति

Gaya News : सीयूएसबी में रविवार को 19वीं डीजीसीएसआइ (भारतीय भूगोल समाज) अंतरराष्ट्रीय भूगोल सम्मेलन का शुभारंभ हुआ.
गया. सीयूएसबी में रविवार को 19वीं डीजीसीएसआइ (भारतीय भूगोल समाज) अंतरराष्ट्रीय भूगोल सम्मेलन का शुभारंभ हुआ. सम्मेलन में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं की भागीदारी हो रही है. उद्घाटन सत्र में सीयूएसबी के कुलपति प्रोफेसर कमेश्वर नाथ सिंह ने विश्वविद्यालय के सामने आनेवाली चुनौतियों के बारे में बात की. उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि इस भू-स्थानिक युग में जानकारी का उपयोग बहुत सावधानीपूर्वक और नैतिक रूप से किया जाना चाहिए. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि औपचारिक उद्घाटन के बाद कार्यशाला के संयोजक सह अध्यक्ष, भूगोल विभाग प्रो किरण कुमारी ने अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया. उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 23 राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी भी शामिल हुए हैं. उन्होंने कहा कि अगले तीन दिनों में 300 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये जायेंगे. सम्मेलन में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के सतत विकास में योगदान के बारे में चर्चा की जायेगी जो भारत के विकसित भारत के दृष्टिकोण पर आधारित है. इसके बाद डीजीसीएसआइ के महासचिव डॉ बीसी वैद्य ने सोसाइटी के उद्देश्यों और गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. सीयूएसबी के स्कूल ऑफ अर्थ, बायोलॉजिकल एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज के डीन प्रो रिजवानुल हक ने भारत के विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डाला व राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया. द यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज के प्रोफेसर प्रो विद्याधर सा ने विश्वविद्यालयों के लिए सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) व वैश्विक एसडीजी एजेंडा 2030 पर अपने विचार व्यक्त किये.
सूचना के युग में विज्ञान, नीति और समाज को जोड़ने की आवश्यकता
त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल के प्रमुख प्रो उमेश कुमार मंडल ने मुख्य भाषण देते हुए कहा कि सूचना के युग में विज्ञान, नीति और समाज को जोड़ने की आवश्यकता है ताकि एक बेहतर भविष्य का निर्माण हो सके. उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आइआइटी पटना के निदेशक प्रो टीएन सिंह ने कहा कि इस सम्मेलन में शैक्षणिक सीमाएं टूट चुकी हैं और उन्होंने तकनीकी उपयोग की सावधानी और बड़ी डेटा मात्रा के प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया. उद्घाटन सत्र में रजिस्ट्रार प्रो नरेंद्र कुमार राणा के सहयोग से इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान मिला. सत्र का समापन आयोजन सचिव एवं सीयूएसबी के भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मंजीत कुमार सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. कार्यक्रम का संचालन डॉ सुनीता सिंह ने किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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