'5000 वर्ष पुरानी है भारतीय सभ्यता', राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बताई इंडियन सिविलाइज़ेशन की विशेषता

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 11 Feb 2025 9:51 PM

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बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान

Governor Arif Mohammad Khan on Indian Civilization: बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान मंगलवार को 'एकात्म मानववाद के सामाजिक पहलू' पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों पर भी हमारे पुराने ग्रंथों ने गहरा प्रभाव डाला है.

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Governor Arif Mohammad Khan on Indian Civilization: बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान मंगलवार को आइसीएसएसआर के एक कार्यक्रम में भाग लेने गया पहुंचे. यहां उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता लगभग 5000 वर्ष पुरानी है. महान भारतीय दार्शनिकों द्वारा दिये गये विचारों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि देश ने मानव जाति को देवत्व की अवधारणा दी है. सदियों पुराने भारतीय दर्शन ने पश्चिमी देशों सहित दुनिया को प्रभावित किया है और यहां तक कि उन्होंने हमारे पुराने ग्रंथों का रूपांतरण कर गहन अध्ययन भी किया है. भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नयी दिल्ली द्वारा समर्थित दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानववाद और सामाजिक नीति केंद्र द्वारा आयोजित ”एकात्म मानववाद के सामाजिक पहलू” पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह राज्यपाल ने कहा कि भारतीय अवधारणा हमें सभी संस्कृतियों और विविधता का सम्मान करना सिखाती है.

ज्ञान और बुद्धि के प्रचार के लिए जानी जाती है भारतीय सभ्यता

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि विश्व में पांच प्रमुख सभ्यताएं हैं, ईरानी, चीनी, रोमन, तुर्क और भारतीय, जो अपने-अपने महत्व के लिए जानी जाती हैं. भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ज्ञान और बुद्धि के प्रचार के लिए जानी जाती है. इस कारण हमें अपने प्राचीन शास्त्रों में मानवता का वास्तविक अर्थ खोजने की आवश्यकता है और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने पहली बार राजनीतिक क्षेत्र में इस अवधारणा का प्रयोग किया था. अपने व्याख्यान के दौरान राज्यपाल ने भगवद् गीता, वेदों के श्लोकों और आदि शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद व भारत के अन्य महान दार्शनिकों के कथनों को उद्धृत किया.

उन्होंने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा कि हमारे संविधान निर्माता प्रस्तावना में इतने सारे बिंदुओं को रखने के बजाय एकात्म मानववाद शब्द का प्रयोग कर सकते थे, जो विविधतापूर्ण और विशाल देश भारत के लिए बहुत उपयुक्त है. उद्घाटन समारोह में इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ राम माधव ने कहा कि भारत निःसंदेह एक महान देश है. लेकिन, अंतरराष्ट्रीय मंच पर महान विचारकों को पैदा न करने के लिए हमारी आलोचना की जाती है. मेरे लिए पिछली सदी में देश ने दो महान मौलिक विचारकों को जन्म दिया. एक महात्मा गांधी और दूसरे पंडित दीनदयाल उपाध्याय. लेकिन, भारत में हम अपनी जड़ों की ओर ध्यान देने के बजाय पश्चिमी दर्शन से ज्यादा प्रभावित हैं. इसलिए दुनिया हमारी आलोचना करती है.

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सम्मेलन में युवा विद्वानों प्रस्तुत किये शोधपत्र

सीयूएसबी के पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि अगले सत्रों में डॉ विनय सहस्रबुद्धे, पूर्व सांसद (राज्यसभा) सह नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो सुनैना सिंह, डॉ राम माधव, विभागाध्यक्ष, दर्शनशास्त्र, सोरबोन विश्वविद्यालय, अबू धाबी के प्रो क्लाउड विष्णु स्पाक, जेएनयू से प्रो. वंदना मिश्रा, पटना विश्वविद्यालय से डॉ गुरु प्रकाश पासवान, सीयूएसबी के डीन प्रो. प्रणव कुमार ने भी विषय पर अपने विचार साझा किये. सेंटर के कॉर्डिनेटर और सेमिनार के संयोजक डॉ सुधांशु कुमार झा व को-कॉर्डिनेटर डॉ रोहित कुमार ने बताया कि समानांतर सत्र में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन युवा विद्वानों ने अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किये.

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Paritosh Shahi

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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