गया जी में समर कैंप बना प्रतिभाओं का मंच, बिहार से त्रिपुरा तक के लोकनृत्य सीख रहे बच्चे, जानिए कब तक होगा रजिस्ट्रेशन

Published by : Sakshi kumari Updated At : 11 Jun 2026 9:43 AM

विज्ञापन

समर कैंप में लोकनृत्य सीख रहे छात्र

Gaya ji Summer Camp: गया जी का यह समर कैंप बच्चों के लिए मनोरंजन और शिक्षा का अनूठा संगम साबित हो रहा है. लोकनृत्य, संगीत, चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के जरिए बच्चे अपनी प्रतिभा को नई उड़ान दे रहे हैं.

विज्ञापन

गया जी से हरीबंश कुमार की रिपोर्ट
Gaya ji Summer Camp:
बिहार के सरकारी स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां चल रही है. समर वेकेशन में प्रदेश के सभी जिलों में समर कैंप का भी आयोजन किया जा रहा है. जहां बच्चे अलग अलग हुनर सीख रहे हैं. इसी कड़ी में गयाजी के किलकारी परिसर में चल रहे समर कैंप ‘चक धूम-धूम’ में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा है.

मनोरंजन ही नहीं भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी जान रहे बच्चे

यहां बच्चे सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से जान रहे हैं. बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध लोकनृत्यों का प्रशिक्षण लेकर बच्चे नई कलाओं को सीखने के साथ अपनी प्रतिभा को भी निखार रहे हैं. 20 जून तक चलने वाले इस समर कैंप के लिए 15 जून तक पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है.

बिहार, त्रिपुरा और बंगाल के लोकनृत्य सीख रहे बच्चे

किलकारी परिसर में आयोजित समर कैंप के दौरान बच्चों को देश के विभिन्न राज्यों के लोकनृत्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. नृत्य प्रशिक्षक गौतम कुमार गोलू ने बच्चों को बिहार के प्रसिद्ध झिझिया नृत्य, त्रिपुरा के होजागिरी नृत्य और पश्चिम बंगाल के लोकनृत्य की बारीकियां सिखाईं.

लोकनृत्य के साथ संस्कृति और परंपराओं की भी मिल रही जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को सिर्फ नृत्य ही नहीं, बल्कि संबंधित राज्यों की संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन के बारे में भी विस्तार से बताया गया. इससे बच्चों में देश की विविध संस्कृतियों को समझने और जानने की रुचि बढ़ रही है.

प्रतिभा निखारने का शानदार मंच बना समर कैंप

प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव और सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार ने बताया कि समर कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है. कैंप में बच्चों को सीखने और खुद को अभिव्यक्त करने का बेहतर अवसर मिल रहा है.

नृत्य के साथ संगीत, चित्रकला और नाटक का भी प्रशिक्षण

नृत्य प्रशिक्षक गौतम कुमार गोलू ने बताया कि लोकनृत्य देश की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि कैंप में नृत्य के अलावा संगीत, चित्रकला, नाटक, क्राफ्ट और अन्य रचनात्मक गतिविधियों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके.

15 जून तक करा सकते हैं पंजीकरण

समर कैंप में शामिल होने के इच्छुक बच्चों के लिए 15 जून तक पंजीकरण की सुविधा दी गई है. अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन कराकर उन्हें विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ सकते हैं. ‘चक धूम-धूम’ समर कैंप बच्चों के लिए सीखने, समझने और अपनी प्रतिभा को निखारने का बेहतरीन मंच बन गया है. यहां बच्चे नई कलाएं सीखने के साथ-साथ भारत की विविध और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से समझ रहे हैं.

Also Read: गया जी में सहायक रसोइया पद के लिए 501 आवेदन, काउंसिलिंग में पहुंचे सिर्फ 48 अभ्यर्थी, कई अन्य पदों पर भी होगी नियुक्ति

विज्ञापन
Sakshi kumari

लेखक के बारे में

By Sakshi kumari

साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन